Tera kisne Kiya Singaar Saawre Lyrics in Hindi
तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे,
तू लगे दूल्हा सा दिलदार सांवरे ।
मस्तक पर मलियागिरी चन्दन,
केसर तिलक लगाया ।
मोर मुकुट कानो में कुण्डल,
इत्र खूब बरसाया ।
महकता रहे यह दरबार सांवरे,
तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे ॥
बागो से कलियाँ चुन चुन कर,
सुन्दर हार बनाया ।
रहे सलामत हाथ सदा वो,
जिसने तुझे सजाया ।
सजाता रहे वो हर बार सांवरे
तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे ॥
बोल सांवरे बोल तुम्हे मैं,
कौन सा भजन सुनाऊँ ।
ऐसा कोई राग बतादे,
तू नाचे मैं गाऊं ।
नचाता रहूँ मैं हर बार सांवरे,
तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे ॥
Tera kisne Kiya Singaar Saawre Lyrics in English
Tera kisne kiya shringaar saawre,
Tu lage dulha sa dil-daar saawre.
Mastak par maliyaagiri chandan,
Kesar tilak lagaya.
Moor mukut kaano mein kundal,
Itr khoob barsaya.
Mahakta rahe yah darbaar saawre,
Tera kisne kiya shringaar saawre.
Baagon se kaliyan chun chun kar,
Sundar haar banaya.
Rahe salaamat haath sada wo,
Jisne tujhe sajaya.
Sajata rahe wo har baar saawre,
Tera kisne kiya shringaar saawre.
Bol saawre bol tumhe main,
Kaun sa bhajan sunaoon.
Aisa koi raag batade,
Tu naache main gaoon.
Nachata rahoon main har baar saawre,
Tera kisne kiya shringaar saawre.”
About Tera kisne Kiya Singaar Saawre Bhajan in English
“Tera Kisne Kiya Singaar Saawre” is a beautiful devotional bhajan that praises the divine beauty and charm of Lord Krishna. The bhajan focuses on the spiritual and physical adornments of Lord Krishna, celebrating his attractiveness and divinity through vivid imagery. The lyrics emphasize Krishna’s perfect and divine appearance, the love he inspires, and the devotion of his followers.
- The Divine Adornment of Lord Krishna: The central theme of the bhajan is Lord Krishna’s celestial adornment. “Tera kisne kiya singaar saawre” (Who has decorated you, O beautiful one?) is a rhetorical question that highlights the divine beauty of Krishna. The bhajan beautifully describes how Krishna is adorned with sandalwood on his forehead, mango-scented perfume, and a peacock feather crown. These vivid images paint a picture of Krishna’s majestic and mesmerizing appearance.
- The Eternal Beauty of Krishna: The verse “Mahakta rahe yeh darbaar saawre” (Let this divine court always remain fragrant) refers to the eternal beauty of Krishna, suggesting that wherever Krishna is, there is always an aura of divine fragrance, symbolizing his pure and enchanting nature. The description of Krishna’s adornments also emphasizes his grace and the admiration he commands from his devotees.
- Devotion and Adoration: The bhajan continues with the portrayal of a devotee’s deep love and admiration for Krishna. “Bago se kaliyan chun chun kar, sundar haar banaya” speaks of the flowers that are collected from the garden to create beautiful garlands for Krishna. It signifies the loving devotion of the devotee who desires to present the best of what the world has to offer to Lord Krishna.
- The Role of Krishna’s Devotee: The bhajan also acknowledges the role of the devotee in adorning Krishna. “Rahe salaamat haath sada woh, jisne tujhe sajaya” (May the hand that adorned you remain blessed forever) suggests the deep respect and honor given to the one who decorates Krishna, symbolizing the devotee’s sacred role in serving and loving the divine.
- Surrender and Service through Music and Dance: The final verse of the bhajan expresses the devotee’s desire to serve Krishna through music and dance. “Bol saawre bol tumhe main, kaun sa bhajan sunaoon” (Tell me, O Lord, which hymn should I sing for you?) reveals the devotee’s longing to connect with Krishna through worship, music, and rhythm. The devotee is ready to sing and dance in Krishna’s praise, fully immersed in the devotion to the divine.
Overall, “Tera Kisne Kiya Singaar Saawre” is a beautiful expression of Lord Krishna’s divine beauty and the unending devotion of his followers. The bhajan calls attention to the perfection of Krishna’s form, the joy of adorning him, and the heartfelt adoration of his devotees. It emphasizes the connection between the divine and the devotee, with music and dance being the perfect expressions of love and reverence. The bhajan inspires the devotee to continue their service and devotion to Krishna, making him the center of their life and worship.
About Tera kisne Kiya Singaar Saawre Lyrics in Hindi
“तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे” भजन के बारे में
“तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे” एक अत्यंत सुंदर और भक्ति से भरा भजन है जो भगवान श्री कृष्ण के रूप और उनके दिव्य आभूषणों का गुणगान करता है। यह भजन कृष्ण के शारीरिक रूप और उनकी सजीव उपस्थिति को श्रद्धा और प्रेम के साथ प्रस्तुत करता है, जिसमें उनके सुंदर श्रृंगार और आभूषणों का विस्तार से वर्णन किया गया है। भजन में कृष्ण के रूप की महिमा, उनके दिव्य आकर्षण, और भक्तों के प्रति उनके प्रेम को चित्रित किया गया है।
- कृष्ण का दिव्य श्रृंगार: भजन का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण के आकर्षक रूप और दिव्य श्रृंगार पर आधारित है। “तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे” पंक्ति में यह सवाल उठाया गया है कि भगवान कृष्ण को सजाने वाला कौन है, जो उनके रूप को और भी आकर्षक बनाता है। भजन में कृष्ण के माथे पर चंदन का तिलक, मोर मुकुट, कानों में कुण्डल और इत्र का सुगंधित छिड़काव किया गया है, जो उनके दिव्य रूप को और भी सुंदर बनाते हैं।
- भगवान कृष्ण की दिव्य सुंदरता: भजन में यह दर्शाया गया है कि भगवान कृष्ण के रूप में दिव्यता और सुंदरता का संगम है। “महकता रहे यह दरबार सांवरे” पंक्ति में कृष्ण के अस्तित्व के हर स्थान को महकते हुए बताया गया है, जहां उनके आस-पास की हवा भी फूलों की महक जैसी हो जाती है। कृष्ण के इस रूप में सम्मोहन और आकर्षण है, जो उनके भक्तों को मोहित कर देता है।
- भक्तों की श्रद्धा और सेवा: भजन में भक्तों की श्रद्धा और प्रेम का भी वर्णन किया गया है। “बागों से कलियाँ चुन-चुन कर, सुंदर हार बनाया” पंक्ति में भक्तों द्वारा कृष्ण के लिए सुंदर हार तैयार किया जाता है, जो उनकी दिव्य सेवा और प्रेम को दर्शाता है। भक्त अपने समर्पण के साथ भगवान कृष्ण को सजाते हैं और उन्हें हर बार सबसे सुंदर रूप में प्रस्तुत करने का प्रयास करते हैं।
- कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम: भजन के अंत में भक्त भगवान श्री कृष्ण से यह सवाल करता है कि किस राग में उन्हें गाया जाए और किस भजन को सुनाया जाए, ताकि कृष्ण नाचें और भक्त उनके साथ गाएं। “बोल सांवरे बोल तुम्हे मैं, कौन सा भजन सुनाऊं” पंक्ति में भक्त कृष्ण से उनकी इच्छा के अनुसार सेवा करने की इच्छा व्यक्त करता है, जिसमें प्रेम और भक्ति की गहरी भावना छिपी हुई है।
कुल मिलाकर, “तेरा किसने किया श्रृंगार सांवरे” भजन भगवान श्री कृष्ण के रूप और उनके श्रृंगार की दिव्यता को प्रदर्शित करता है। यह भजन भक्तों को कृष्ण के साथ अपनी भावनाओं को जोड़ने, उनकी भक्ति में खो जाने और उनके रूप को अपने जीवन में हर दिन महसूस करने की प्रेरणा देता है। भगवान कृष्ण के रूप की सुंदरता और भक्तों की सेवा के माध्यम से, यह भजन कृष्ण के प्रति गहरे प्रेम और भक्ति का प्रतीक है।