Sanwariya Teri banshi Bulave mein Daudi aaun Lyrics

Sanwariya Teri banshi Bulave mein Daudi aaun Lyrics

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Sanwariya Teri banshi Bulave Lyrics in Hindi

सवारियां तेरी बंशी बुलावे,मैं दौड़ी आऊं  यमुना किनारे,
मुरली तू जब भी बजावे सुन कर मैं आऊं यमुना किनारे,

यमुना किनारे मेरा मन हारे,यमुना किनारे मोहन मेरा मन हारे,
बांसुरी तेरी मुझको बुलावे  सावरिया तेरी बंशी बुलावे,

यमुना किनारे मोहन तू ना पीआर आया,
बंशी की धुन आई पर कैसे ना तू आया,

मैं ढूंढू तुझे यमुना किनारे सवारिया तेरी बंशी बुलावे,
मुरली तू जब भी बजावे सुन कर मैं आऊं यमुना किनारे,

Sanwariya Teri banshi Bulave Lyrics in Hinglish

Savariya teri banshi bulave, main daudi aaoon Yamuna kinare,
Murli tu jab bhi bajave sun kar main aaoon Yamuna kinare.

Yamuna kinare mera man haare, Yamuna kinare Mohan mera man haare,
Bansuri teri mujhko bulave, Savariya teri banshi bulave.

Yamuna kinare Mohan tu naa piyaar aaya,
Banshi ki dhun aayi par kaise naa tu aaya.

Main dhoondoon tujhe Yamuna kinare, Savariya teri banshi bulave,
Murli tu jab bhi bajave sun kar main aaoon Yamuna kinare.

About Sanwariya Teri banshi Bulave Bhajan in English

“Sanwariya Teri Banshi Bulave” is a deeply devotional bhajan dedicated to Lord Krishna, celebrating his divine presence, the enchanting sound of his flute (bansuri), and the call of his flute that draws the devotee closer to him. The bhajan expresses the devotee’s longing and deep love for Krishna, describing how the sound of Krishna’s flute fills the devotee’s heart with an irresistible desire to come to him, especially near the Yamuna River, a sacred place closely associated with Krishna’s childhood.

  • The Call of Krishna’s Flute: The central theme of the bhajan revolves around the mesmerizing sound of Krishna’s flute. “Sanwariya teri banshi bulave” (O beloved, your flute calls me) symbolizes how the sound of Krishna’s flute calls the devotee to him, much like it did for the gopis (cowherd girls) in the fields of Vrindavan. The flute serves as a divine instrument, pulling the devotee towards Krishna in a spiritual connection.
  • The Desire to Be with Krishna: The devotee expresses a longing to be near Krishna, as his soul is irresistibly drawn to him. “Yamuna kinare mera man haare” (On the banks of the Yamuna, my heart surrenders) reflects the emotional and spiritual pull that Krishna’s presence creates. The Yamuna river represents the sacred place where Krishna often played his flute, and it is the setting for this intense desire of the devotee to connect with him.
  • The Unfulfilled Longing: The bhajan also touches on the feeling of unfulfilled longing when Krishna does not immediately respond to the devotee’s call. “Yamuna kinare Mohan tu na pyaar aaya” (Mohan, you did not come to the banks of Yamuna) signifies the moments when Krishna’s presence is missed, and the devotee waits for his arrival. The sound of the flute is heard, but Krishna is not immediately visible, intensifying the longing.
  • The Devotee’s Search for Krishna: The bhajan expresses the devotee’s deep desire and search for Krishna. “Main dhoondoon tujhe Yamuna kinare” (I will search for you at the banks of Yamuna) portrays the devotee’s eagerness to find Krishna and unite with him, no matter the distance or the wait. The search for Krishna symbolizes the spiritual pursuit of ultimate connection and divine grace.
  • Divine Love and Devotion: Overall, “Sanwariya Teri Banshi Bulave” is a beautiful expression of divine love, longing, and devotion. The flute’s call represents Krishna’s divine invitation to his devotees, inviting them to surrender to his love. The bhajan inspires devotees to remain patient and dedicated in their devotion, awaiting Krishna’s call, which will lead them to eternal union with him.

In essence, the bhajan conveys the timeless theme of a devotee’s longing to be in the presence of Lord Krishna, driven by the allure of his flute, and highlights the spiritual bond that is formed through love, devotion, and the sacred connection between the devotee and the divine.

About About Sanwariya Teri banshi Bulave Bhajan in Hindi

“सनवरिया तेरी बंशी बुलावे” भजन के बारे में

“सनवरिया तेरी बंशी बुलावे” एक अत्यंत भावपूर्ण और भक्तिपूर्ण भजन है जो भगवान श्री कृष्ण की दिव्यता और उनके दिव्य बंशी की महिमा को प्रस्तुत करता है। इस भजन में भगवान श्री कृष्ण के दिव्य आकर्षण, उनकी बंशी के माध्यम से भक्तों से जुड़ने की प्रेरणा और कृष्ण के प्रति भक्ति की गहरी भावना को व्यक्त किया गया है। भजन में यह दिखाया गया है कि कैसे श्री कृष्ण की बंशी के स्वर भक्तों के दिलों को आकर्षित करते हैं और उन्हें अपने पास बुलाते हैं।

  • कृष्ण की बंशी का आकर्षण: भजन का मुख्य विषय भगवान श्री कृष्ण की बंशी (बांसुरी) और उसकी धुन है, जो भक्तों को अपने पास बुलाती है। “सनवरिया तेरी बंशी बुलावे” पंक्ति में यह दर्शाया गया है कि भगवान श्री कृष्ण के बंशी की मधुर धुन भक्तों को अपनी ओर आकर्षित करती है। कृष्ण की बंशी की ध्वनि को सुनकर, भक्त बिना किसी देरी के उनके पास दौड़े चले आते हैं, क्योंकि वह ध्वनि उनके दिल में एक अद्वितीय प्रेम और दिव्य आकर्षण उत्पन्न करती है।
  • यमुना किनारे कृष्ण के साथ जुड़ने की इच्छा: भजन में यमुना नदी के किनारे की विशेषता का भी उल्लेख किया गया है, जो भगवान श्री कृष्ण के बचपन और उनकी लीलाओं से जुड़ा हुआ स्थान है। “यमुना किनारे मेरा मन हारे” पंक्ति में भक्त अपने मन की हार और कृष्ण के प्रति असीम प्रेम को व्यक्त करता है। यमुना के किनारे कृष्ण के साथ होने की इच्छा, उनके दर्शन पाने की लालसा को इस भजन में चित्रित किया गया है।
  • भक्त की प्रतीक्षा और ललक: भजन में यह भी बताया गया है कि जब कृष्ण की बंशी की धुन सुनाई देती है, तो भक्त उनका इंतजार करते हैं और उनकी तलाश में रहते हैं। “यमुना किनारे मोहन तू ना पिया आया, बंशी की धुन आई पर कैसे ना तू आया” पंक्ति में भक्त की चिंता और कृष्ण के आने की प्रार्थना व्यक्त की गई है। यह पंक्ति दर्शाती है कि कृष्ण की उपस्थिति का एहसास होने के बावजूद, भक्तों का मन और भी उत्साहित हो जाता है।
  • कृष्ण के प्रति अनन्य प्रेम: भजन का अंतिम भाग भक्त की कृष्ण के प्रति असीम श्रद्धा और प्रेम को व्यक्त करता है। “मैं ढूंढू तुझे यमुना किनारे” पंक्ति में भक्त अपनी पूरी निष्ठा और प्रेम के साथ कृष्ण को यमुना के किनारे ढूंढने की बात करता है, जो यह दर्शाता है कि कृष्ण के साथ जुड़ने का अद्वितीय अनुभव प्राप्त करने के लिए भक्त किस हद तक समर्पित हैं।

कुल मिलाकर, “सनवरिया तेरी बंशी बुलावे” भजन भगवान श्री कृष्ण के दिव्य आकर्षण और उनके प्रति भक्तों की अनन्य श्रद्धा को व्यक्त करता है। यह भजन भक्तों को कृष्ण के स्वरूप, उनकी बंशी और उनके साथ होने के दिव्य आनंद का अहसास कराता है। साथ ही, यह भजन कृष्ण के प्रति गहरी भक्ति, प्रेम और समर्पण की प्रेरणा भी देता है।

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