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आरती कुबेर की — क्षेत्रीय देव आरती

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जय कुबेर महाराज, जय धन के स्वामी।
यक्षराज अलकापुरी, तुम अन्तर्यामी॥
उत्तर दिशा के दिक्पाल, धनाध्यक्ष कहावे।
पुलस्त्य वंशज देवा, लक्ष्मी संग आवे॥
जय कुबेर महाराज॥
नव निधि के स्वामी तुम, अष्ट निधि रक्षक।
स्वर्ण रजत मणि माणिक्य, सब तुम्हरे अक्षक॥
जय कुबेर महाराज॥
पुष्पक विमान था तुम्हरो, लंका भी तुम्हारी।
रावण ने छीन ली, फिर भी दया तुम्हारी॥
जय कुबेर महाराज॥
दीवाली की रात में, कुबेर पूजा होवे।
तिजोरी में कुबेर यन्त्र, धन कभी न खोवे॥
जय कुबेर महाराज॥
कुबेर की आरती गावे, धनतेरस दीवाली।
धन सम्पत्ति अपार मिले, भरे सदा खजानो वाली॥
जय कुबेर महाराज॥