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जय नाग देवता, जय शेषनाग भगवान।
विष्णु शय्या सेवक तुम, तुम धरती के प्राण॥
शेष नाग ने धारा जग, सहस्र फण विराजे।
वासुकी ने समुद्र मन्थन, देवों का काम साजे॥
जय नाग देवता॥
शिव कण्ठ में विराजत, नाग नाथ कहावे।
तक्षक और कालिया नाग, पुराणों में गावे॥
जय नाग देवता॥
नाग पंचमी के दिन, दूध चढ़ाए जन।
सर्प को देव मानकर, पूजे तन और मन॥
जय नाग देवता॥
हिमाचल में नाग देवता, मनसा देवी माँ।
केरल में नाग पूजा, भारत की शान॥
जय नाग देवता॥
नाग देवता की आरती, नाग पंचमी गाये।
सर्प भय से मुक्त होकर, कालसर्प दोष जाये॥
जय नाग देवता॥