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जय पितृ देवता, जय कुल के पूर्वज।
पितृ पक्ष में आओ, स्वीकारो अर्पण सज॥
श्राद्ध पक्ष में याद करें, सब अपने पूर्वजों को।
तर्पण और पिण्डदान से, शांति मिले आत्मा को॥
जय पितृ देवता॥
गया जी में पिण्डदान, सर्वोत्तम मानी।
फल्गु नदी के तट पर, विधि अति पुरानी॥
जय पितृ देवता॥
कौवे को भोजन दो, पितृ ग्रास कहावे।
तिल कुश और जल से, तर्पण सुख पावे॥
जय पितृ देवता॥
अमावस्या को सर्व पितृ, तिथि मान विशेष।
सभी पितरों का श्राद्ध, करें प्रेम परिशेष॥
जय पितृ देवता॥
पितृ पक्ष की आरती, श्रद्धा से गाये।
पितृ दोष शांत हो, कुल में सुख आये॥
जय पितृ देवता॥