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जय राहु देव भगवान, जय छाया ग्रह देवा।
स्वर्भानु दानव अंश तुम, करें तव सेवा॥
सिंहिका सुत राहु तुम, अमृत पान किया।
सूर्य चन्द्र ने बताया, विष्णु ने शीश दिया॥
जय राहु देव॥
ग्रहण लगाते सूर्य चन्द्र पर, प्रभाव अति भारी।
अठारह वर्ष की दशा, कर्म अनुसारी॥
जय राहु देव॥
राहु दोष और कालसर्प, शांति तुमसे होवे।
नारियल और उड़द दान, कष्ट सब खोवे॥
जय राहु देव॥
शनिवार रात्रि में पूजो, काला वस्त्र धारो।
गोमेद रत्न राहु का, बाधा सब टारो॥
जय राहु देव॥
राहु देव की आरती, भक्ति भाव से गाये।
राहु दोष और कालसर्प, सब शांत हो जाये॥
जय राहु देव॥