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जय शुक्र भगवान, जय दैत्य गुरु देवा।
श्वेत वर्ण अति तेजस्वी, करें तव सेवा॥
वृष और तुला के स्वामी, शुक्रवार के राजा।
भृगु पुत्र शुक्राचार्य, तुम दानवों के ताजा॥
जय शुक्र भगवान॥
संजीवनी विद्या जाने, मृत को जीवित करते।
भक्ति काव्य कला में, तुम प्रेम रस भरते॥
जय शुक्र भगवान॥
सुख ऐश्वर्य और सौन्दर्य, वाहन विलास दो।
शुक्र दोष शांत करो प्रभु, जीवन सुख भरो॥
जय शुक्र भगवान॥
श्वेत वस्त्र श्वेत पुष्प, खीर का भोग लगाओ।
हीरा रत्न शुक्र का, दोष सब मिटाओ॥
जय शुक्र भगवान॥
शुक्र देव की आरती, शुक्रवार को गाये।
सुख समृद्धि और सौन्दर्य, जीवन में पाये॥
जय शुक्र भगवान॥