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आरती विश्वनाथ जी की — Vishwanath Aarti
आरती विश्वनाथ जी की, जय काशी विश्वनाथ जी की।
गंगा तट पर विराजमान, गंगा तट पर विराजमान,
काशी में शोभा भारी॥ आरती विश्वनाथ जी की॥
बनारस की शान तुम हो, विश्वेश्वर महादेव।
आरती विश्वनाथ जी की।
द्वादश ज्योतिर्लिंग में शोभित, द्वादश ज्योतिर्लिंग में शोभित,
करते भक्तन की सेव॥ आरती विश्वनाथ जी की॥
भस्म आरती प्रातः होवे, श्रृंगार सजाएँ शाम।
आरती विश्वनाथ जी की।
पंचामृत अभिषेक करें, पंचामृत अभिषेक करें,
बोलें शिव शिव नाम॥ आरती विश्वनाथ जी की॥
मणिकर्णिका घाट की शोभा, मुक्ति मिले यहाँ आकर।
आरती विश्वनाथ जी की।
अंतिम समय जो काशी आवे, अंतिम समय जो काशी आवे,
मुक्ति दें भगवान सुनकर॥ आरती विश्वनाथ जी की॥
हर हर महादेव बोलो, काशी नगरी जय हो।
आरती विश्वनाथ जी की।
विश्वनाथ की कृपा से, विश्वनाथ की कृपा से,
सबका मंगल भय हो॥ आरती विश्वनाथ जी की॥