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जय जय अयप्पा स्वामी, जय हरिहर पुत्रा।
शबरीमला वासी देवा, भक्तन सुखकर्ता॥
स्वामिये शरणम् अयप्पा, स्वामिये शरणम् अयप्पा॥
हरि और हर के पुत्र तुम हो, मोहिनी सुत प्यारे।
शास्ता देव महाशास्ता तुम, भक्तन के रखवारे।
अठारह पहाड़ी चढ़ कर, भक्त तुम्हें पाते।
इरुमुडी शीश पर धरकर, मंडल व्रत रखाते॥
स्वामिये शरणम् अयप्पा, स्वामिये शरणम् अयप्पा॥
काली वस्त्र धारण करके, व्रत कठोर पाले।
मालामंत्र जपें भक्तजन, नियम से ब्रह्मचर्य चाले।
पम्पा नदी में स्नान करके, दीक्षा ग्रहण करते।
ज्योति दर्शन मकर संक्रांति, दिव्य ज्योत निहारते॥
स्वामिये शरणम् अयप्पा, स्वामिये शरणम् अयप्पा॥
तारकासुर वध किया तुमने, धर्म रक्षा की।
शबरीमला के स्वामी प्रभु, जगत को शांति दी।
जाति पाँति भेद नहीं तेरे, सब समान हैं द्वारे।
अयप्पा स्वामी कृपा बरसाओ, भक्तन के रखवारे॥
जय जय अयप्पा स्वामी, जय हरिहर पुत्रा।
शबरीमला वासी देवा, भक्तन सुखकर्ता॥