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जय माँ सरस्वती देवी, जय बसन्त की रानी।
पीत वस्त्र धारे माता, विद्या की निशानी॥
जय बसन्त पंचमी, जय सरस्वती माता॥
माघ शुक्ल पंचमी को, बसन्त ऋतु आती।
सरस्वती का जन्मदिन, पूजा विशेष होती।
पीले वस्त्र पहनकर, पीला भोग लगाकर।
वीणा पुस्तक माला लेकर, माता को मनाकर॥
जय बसन्त पंचमी, जय सरस्वती माता॥
बच्चों को विद्यारम्भ, इस दिन करवाते।
कलम दवात पुस्तक, माता चरण में लाते।
सरसों के पीले फूल खिले, धरती पीली छाई।
बसन्त का स्वागत करके, माता पूजन आई॥
जय बसन्त पंचमी, जय सरस्वती माता॥
कवि लेखक कलाकार सब, माता को पूजें।
वाद्य यन्त्र पुस्तक कलम, माता चरणों में झूलें।
बसन्त पंचमी आरती गाओ, विद्या का वरदान लो।
सरस्वती माता कृपा से, ज्ञान का उजाला लो॥
जय माँ सरस्वती देवी, जय बसन्त की रानी।
पीत वस्त्र धारे माता, विद्या की निशानी॥