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जय भैया जय भैया, भाई दूज का दिन आया।
यमुना ने यमराज को, प्रेम से बुलाया॥
जय भाई दूज, जय यम द्वितीया॥
कार्तिक शुक्ल द्वितीया को, भाई दूज मनाते।
दीपावली के दो दिन बाद, बहनें भाई बुलाते।
तिलक लगाकर आरती करके, भोजन परोसकर।
बहन भाई की लम्बी उम्र, माँगे ईश्वर॥
जय भाई दूज, जय यम द्वितीया॥
यमराज बहन यमुना घर, इस दिन पधारे।
यमुना ने प्रेम से भैया, भोजन कराये।
यम ने दिया वरदान तभी, जो इस दिन बहन के यहाँ।
भाई जाये भोजन करे, उसे मृत्यु भय नाहीं॥
जय भाई दूज, जय यम द्वितीया॥
नाक पर तिलक सजाओ, आरती उतारो।
भाई को मिष्ठान खिलाओ, दीर्घायु पुकारो।
भाई दूज आरती गाओ, प्रेम रस बरसाओ।
भाई बहन का रिश्ता पावन, सदा जीवित रखो॥
जय भैया जय भैया, भाई दूज का दिन आया।
यमुना ने यमराज को, प्रेम से बुलाया॥