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जय गोवर्धन महाराज, जय गिरिराज धारी।
कृष्ण ने उठाया कनिष्ठा पर, इन्द्र हारी॥
जय गोवर्धन, जय गिरिराज॥
अन्नकूट का भोग लगे, छप्पन भोग सजाये।
गोवर्धन पर्वत की पूजा, कृष्ण ने करवाये।
इन्द्र का अभिमान तोड़ा, सात दिन धारा।
गोकुल वासियों की रक्षा, कृष्ण ने गिरि धारा॥
जय गोवर्धन, जय गिरिराज॥
गोबर से गोवर्धन बने, आँगन में सजाये।
अन्नकूट का प्रसाद बनाकर, भोग अर्पण लाये।
गौ माता की पूजा करो, गौ सेवा है प्यारी।
कृष्ण ने कहा गोवर्धन में, मैं ही हूँ विहारी॥
जय गोवर्धन, जय गिरिराज॥
दीपावली के दूजे दिन, गोवर्धन मनाते।
परिक्रमा गिरि की करके, सुख सम्पत्ति पाते।
गोवर्धन पूजा आरती, प्रेम से सब गाओ।
गिरिराज धारी कृष्ण की, जय जयकार मनाओ॥
जय गोवर्धन महाराज, जय गिरिराज धारी।
कृष्ण ने उठाया कनिष्ठा पर, इन्द्र हारी॥