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जय घृष्णेश्वर महादेव, जय ज्योतिर्लिंग स्वामी।
एल्लोरा के निकट विराजे, तू अन्तर्यामी॥
ॐ नमः शिवाय, जय घृष्णेश्वर॥
औरंगाबाद जिले में शोभे, वेरुल ग्राम निकट।
एल्लोरा की गुफाओं पास, प्राचीन मन्दिर अभिवत।
बारहवाँ ज्योतिर्लिंग यह, अन्तिम लिंग सोहे।
घुश्मेश्वर भी कहते इसको, शिव भक्त मन मोहे॥
ॐ नमः शिवाय, जय घृष्णेश्वर॥
घुश्मा देवी की भक्ति से, शिव यहाँ प्रकट हुए।
सरोवर में शिवलिंग डाले, चमत्कार दिखा दुए।
पुत्र वध से दुखी घुश्मा को, शिव ने जीवन दिया।
करुणा कर प्रकट हुए शिव, ज्योतिर्लिंग रूप लिया॥
ॐ नमः शिवाय, जय घृष्णेश्वर॥
लाल पत्थर से बना मन्दिर, शिल्प कला अनुपम।
दक्षिणाभिमुख नन्दी शोभे, छोटा पर अति उत्तम।
घृष्णेश्वर आरती गाओ, द्वादश लिंग पूर्ण।
बारहों ज्योतिर्लिंग दर्शन, जीवन हो सम्पूर्ण॥
जय घृष्णेश्वर महादेव, जय ज्योतिर्लिंग स्वामी।
एल्लोरा के निकट विराजे, तू अन्तर्यामी॥