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हरिद्वार गंगा आरती — क्षेत्रीय देवता आरती
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ॐ जय गंगा माता, हरिद्वार की शान।
हर की पौड़ी ब्रह्मकुण्ड, पवित्र स्नान ज्ञान॥
ॐ जय गंगे हर, ॐ जय गंगे हर॥
हरि के द्वार हरिद्वार, स्वर्ग का द्वार कहलाये।
गंगा माता मैदान में, पहली बार यहाँ आये।
ब्रह्मकुण्ड में स्नान करो, सब पाप कट जाते।
हर की पौड़ी दीप छोड़ो, मनोकामना पूर्ण होते॥
ॐ जय गंगे हर, ॐ जय गंगे हर॥
सन्ध्या आरती का दृश्य, अलौकिक अद्भुत।
बड़ी बड़ी अग्नि की थाली, पंडित हाथ में उठाते।
घण्टा शंख की ध्वनि गूँजे, मन्त्र उच्चारण होते।
हजारों दीपक गंगा में, बहते जगमगाते॥
ॐ जय गंगे हर, ॐ जय गंगे हर॥
कुम्भ मेला हरिद्वार का, बारह वर्ष में आता।
करोड़ों भक्तन स्नान करें, मोक्ष मार्ग दिखाता।
हरिद्वार गंगा आरती, जो देखे वो धन्य।
गंगा माता की कृपा से, जीवन हो अनन्य॥
ॐ जय गंगा माता, हरिद्वार की शान।
हर की पौड़ी ब्रह्मकुण्ड, पवित्र स्नान ज्ञान॥