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होली आरती — Holi Festival Aarti
होलिका दहन की आरती, प्रह्लाद रक्षा की कथा।
जय होलिका माता, जय अग्नि देवता।
बुराई पर अच्छाई जीती, बुराई पर अच्छाई जीती,
भक्त प्रह्लाद की सत्कथा॥ जय होलिका माता॥
फाल्गुन पूर्णिमा को होली, होलिका दहन करें।
जय होलिका माता।
गोबर उपले लकड़ी रखकर, गोबर उपले लकड़ी रखकर,
होलिका में अग्नि भरें॥ जय होलिका माता॥
परिक्रमा करें होलिका की, नारियल अर्पण करें।
जय होलिका माता।
गेहूँ जौ की बालें भूनें, गेहूँ जौ की बालें भूनें,
गुलाल अबीर उड़ाएँ॥ जय होलिका माता॥
नरसिंह भगवान ने आकर, प्रह्लाद बचाया।
जय होलिका माता।
हिरण्यकश्यपु का नाश किया, हिरण्यकश्यपु का नाश किया,
भक्ति का फल पाया॥ जय होलिका माता॥
अगले दिन रंग खेलें सबने, धुलण्डी मनाएँ।
जय होलिका माता।
रंग गुलाल अबीर लगाकर, रंग गुलाल अबीर लगाकर,
प्रेम भाव बढ़ाएँ॥ जय होलिका माता॥
होली मिलन में सब गले मिलें, दुश्मनी भुलाएँ।
जय होलिका माता।
होली का पर्व प्रेम का पर्व, होली का पर्व प्रेम का पर्व,
सबको गले लगाएँ॥ जय होलिका माता॥