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Jagannath Aarti — जगन्नाथ आरती

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जगन्नाथ आरती — Jagannath Puri Aarti
जय जगन्नाथ स्वामी, नयनाभिरामा।
पुरी क्षेत्र विराजो, पुरी क्षेत्र विराजो,
जय बलभद्र सुभद्रा श्यामा॥ जय जगन्नाथ॥
जगत के नाथ तुम हो, जगन्नाथ कहलाये।
जय जगन्नाथ।
बड़ी बड़ी आँखें शोभें, बड़ी बड़ी आँखें शोभें,
दारू ब्रह्म सजाये॥ जय जगन्नाथ॥
रथ यात्रा की शोभा, विश्व प्रसिद्ध निराली।
जय जगन्नाथ।
आषाढ़ शुक्ल द्वितीया, आषाढ़ शुक्ल द्वितीया,
तीन रथ संवारी॥ जय जगन्नाथ॥
महाप्रसाद अभिषेक, पन्द्रह पकवान।
जय जगन्नाथ।
छप्पन भोग लगाकर, छप्पन भोग लगाकर,
प्रसाद अतुल्य दान॥ जय जगन्नाथ॥
चार धामों में एक पुरी, समुद्र तट शोभे।
जय जगन्नाथ।
जगन्नाथ जी की कृपा से, जगन्नाथ जी की कृपा से,
मुक्ति मिले सब को भे॥ जय जगन्नाथ॥