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करवा चौथ आरती — Karwa Chauth Festival Aarti
करवा चौथ की आरती, चन्द्रमा की आरती।
जय करवा माता, जय करवा माता।
पति की लम्बी आयु हेतु, पति की लम्बी आयु हेतु,
व्रत रखें सुहागन माता॥ जय करवा माता॥
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी को, करवा चौथ मनाएँ।
जय करवा माता।
सरगी खाकर प्रातः काल, सरगी खाकर प्रातः काल,
निर्जल व्रत कर जाएँ॥ जय करवा माता॥
शाम को कथा सुनें सब, करवा चौथ की।
जय करवा माता।
चन्द्रमा उगे तब छलनी से, चन्द्रमा उगे तब छलनी से,
पति मुख देखें प्रीत की॥ जय करवा माता॥
चन्द्रमा को अर्घ्य दो, जल अर्पण करो।
जय करवा माता।
पति के हाथ से जल पीकर, पति के हाथ से जल पीकर,
व्रत का पारण करो॥ जय करवा माता॥
सोलह श्रृंगार करें सब, मेंहदी सिन्दूर लगाएँ।
जय करवा माता।
पति पत्नी का प्रेम बढ़े, पति पत्नी का प्रेम बढ़े,
करवा चौथ मनाएँ॥ जय करवा माता॥
जैसे रानी वीरावती ने, पति प्राण बचाए।
जय करवा माता।
वैसे ही सबका सुहाग सुरक्षित, वैसे ही सबका सुहाग सुरक्षित,
माता कृपा बरसाए॥ जय करवा माता॥