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जय सूर्यदेव भगवान, मकर संक्रांति आई।
उत्तरायण शुभ दिन आज, तिल गुड़ की मिठाई॥
जय सूर्य नारायण, जय मकर संक्रांति॥
मकर राशि में सूर्य जब, प्रवेश करते हैं।
उत्तरायण शुरू होता, दिन बड़े होते हैं।
भीष्म पितामह ने चुना, यही शुभ काल।
देवताओं का दिन शुरू, मांगलिक व्रत चाल॥
जय सूर्य नारायण, जय मकर संक्रांति॥
तिल गुड़ खाओ मीठा बोलो, यह संदेश सुनाओ।
पतंग उड़ाकर आसमान में, सूर्य को मनाओ।
खिचड़ी दान दक्षिणा देकर, पुण्य कमाओ।
गंगा स्नान करो आज, पाप सब मिटाओ॥
जय सूर्य नारायण, जय मकर संक्रांति॥
लोहड़ी पोंगल उत्तरायण, बीहू सब मनाते।
एक ही त्योहार को भारत में, अनेक नाम गाते।
मकर संक्रांति आरती गाओ, सूर्य को नमन करो।
फसल कटाई का जश्न भी, आनन्द से मनाओ॥
जय सूर्यदेव भगवान, मकर संक्रांति आई।
उत्तरायण शुभ दिन आज, तिल गुड़ की मिठाई॥