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जय मल्लिकार्जुन देवा, जय श्रीशैलम् स्वामी।
कृष्णा नदी तट पर विराजे, तू भक्तन अन्तर्यामी॥
ॐ नमः शिवाय, जय मल्लिकार्जुन॥
आन्ध्र प्रदेश श्रीशैलम्, नल्लामला पहाड़।
कृष्णा नदी घाटी में शोभे, मन्दिर भव्य अपार।
शिव पार्वती यहाँ विराजे, दोनों एक साथ।
मल्लिकार्जुन शिवलिंग, भ्रमराम्बा शक्तिपीठ॥
ॐ नमः शिवाय, जय मल्लिकार्जुन॥
कार्तिकेय से मिलने आये, शिव पार्वती यहाँ।
पुत्र प्रेम में बसे सदा, श्रीशैलम् में जहाँ।
ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ, दोनों एक स्थान।
दर्शन मात्र से मोक्ष मिले, अद्भुत है वरदान॥
ॐ नमः शिवाय, जय मल्लिकार्जुन॥
महाशिवरात्रि ब्रह्मोत्सव, लाखों भक्त आते।
पातालगंगा में स्नान कर, पहाड़ चढ़कर जाते।
मल्लिकार्जुन आरती गाओ, श्रीशैलम् की शान।
शिव शक्ति के मिलन का धाम, परम पवित्र स्थान॥
जय मल्लिकार्जुन देवा, जय श्रीशैलम् स्वामी।
कृष्णा नदी तट पर विराजे, तू भक्तन अन्तर्यामी॥