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मुरुगन आरती — क्षेत्रीय देवता आरती
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जय जय मुरुगा देवा, जय षडानन स्वामी।
कार्तिकेय सुब्रह्मण्य, तू सेनापति नामी॥
वेल मुरुगा, वेल मुरुगा॥
षडानन द्वादश भुजा, मयूर वाहन सोहे।
शक्ति वेल हाथ में राजे, दैत्य सेना को रोके।
शिव पार्वती के पुत्र तुम हो, गणेश अनुज प्यारे।
कृत्तिकाओं ने पाला तुमको, छह माताओं के दुलारे॥
वेल मुरुगा, वेल मुरुगा॥
तारकासुर सूरपद्मन, सिंहमुख का नाश किया।
देवताओं को मुक्ति दिलाई, सेनापति पद पाया।
वल्ली देवयानी संग विराजे, दो शक्ति धरी।
पलनी मलाई तिरुचेन्दूर, मन्दिर शोभा भरी॥
वेल मुरुगा, वेल मुरुगा॥
थाईपूसम कावड़ी पूजन, भक्ति अपरम्पार।
वेल चढ़ाकर मुरुगन पूजें, करें पाप का निस्तार।
दक्षिण भारत के देवा तुम, तमिल कुमार स्वामी।
मुरुगन की आरती गाओ, जय षडानन नामी॥
जय जय मुरुगा देवा, जय षडानन स्वामी।
कार्तिकेय सुब्रह्मण्य, तू सेनापति नामी॥