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नागेश्वर आरती — क्षेत्रीय देवता आरती

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जय नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, जय दारुकावन स्वामी।
नागों के ईश्वर प्रभु तुम, भक्तन अन्तर्यामी॥
ॐ नमः शिवाय, जय नागेश्वर॥
द्वारका के समीप विराजे, नागेश्वर महादेव।
दारुकावन में प्रकट हुए, भक्त सुप्रिय की सेव।
दारुका राक्षस का नाश कर, भक्तों को मुक्त किया।
नागेश्वर नाम धारण कर, ज्योतिर्लिंग बना दिया॥
ॐ नमः शिवाय, जय नागेश्वर॥
विशाल शिव मूर्ति बाहर, ध्यानस्थ शिव सोहे।
भूमिगत गर्भगृह में, लिंग दर्शन मन मोहे।
पूर्वाभिमुख ज्योतिर्लिंग, स्वयंभू शिवलिंग।
रुद्राभिषेक करने से, मिटे सकल दुख भीतिलिंग॥
ॐ नमः शिवाय, जय नागेश्वर॥
सर्प दोष निवारण यहाँ, नाग पूजन श्रेष्ठ।
कालसर्प योग शान्ति का, यह स्थान है ज्येष्ठ।
नागेश्वर आरती गाओ, शिव कृपा पाओ।
नागों के नाथ को पूजो, विष भय दूर भगाओ॥
जय नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, जय दारुकावन स्वामी।
नागों के ईश्वर प्रभु तुम, भक्तन अन्तर्यामी॥