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नीलांजना समाभासम् आरती — शनि देव आरती

नीलांजना समाभासम् आरती — शनि देव आरती

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नीलांजना समाभासं, रविपुत्रं यमाग्रजम्।
छायामार्तण्डसम्भूतं, तं नमामि शनैश्चरम्॥
जय जय शनि देवा, जय जय शनि देवा।
तुम्हें निशदिन ध्यावें, करें सब तेरी सेवा॥
नीला वर्ण नीले वस्त्र, नीलम मणि सोहे।
कौवा वाहन लोह रथ, सब भय से रोके।
सूर्यपुत्र छाया नन्दन, यम के अग्रज भ्राता।
कर्मो का फल देने वाले, न्यायी प्रभु विधाता॥
जय जय शनि देवा, जय जय शनि देवा॥
साढ़ेसाती ढैय्या से, जन मन घबराये।
शनि कृपा से सब टल जाये, भक्ति से मन भाये।
तिल तेल दान दो शनिवार, छाया दान करो।
शनि देव प्रसन्न होते तब, संकट सब हरो॥
जय जय शनि देवा, जय जय शनि देवा॥
शनि शिंगणापुर में विराजे, शनि मन्दिर शोभा।
शनि ग्रह को प्रसन्न करने, तप और दान अलोभा।
कर्म करो फल शनि देते, न्याय का है देवता।
शनि देव को प्रणाम करके, पाओ सुख सम्पदा॥
जय जय शनि देवा, जय जय शनि देवा।
तुम्हें निशदिन ध्यावें, करें सब तेरी सेवा॥