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ओंकारेश्वर आरती — क्षेत्रीय देवता आरती

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जय ओंकारेश्वर देवा, जय ज्योतिर्लिंग स्वामी।
नर्मदा द्वीप पर विराजे, ॐ स्वरूप अन्तर्यामी॥
ॐ नमः शिवाय, जय ओंकारेश्वर॥
मान्धाता द्वीप पर विराजे, ॐ आकार में बना।
नर्मदा कावेरी संगम, दो ज्योतिर्लिंग सजा।
ओंकारेश्वर ममलेश्वर, दोनों यहीं विराजे।
शिव का परम धाम यह, भक्तन मन को भाजे॥
ॐ नमः शिवाय, जय ओंकारेश्वर॥
ॐकार प्रणव नाद यहाँ, ब्रह्माण्ड गुंजित होता।
शिव ने ॐ का उच्चारण, यहीं प्रथम किया।
विन्ध्य पर्वत ने तप किया, शिव प्रकट हुए।
ओंकार रूप में लिंग बना, देवता सब झुके॥
ॐ नमः शिवाय, जय ओंकारेश्वर॥
परिक्रमा करें द्वीप की, नर्मदा स्नान करें।
अभिषेक बेलपत्र से, शिव को प्रसन्न करें।
ओंकारेश्वर की आरती, भक्ति से गाओ।
ज्योतिर्लिंग के दर्शन पाकर, मोक्ष का सुख पाओ॥
जय ओंकारेश्वर देवा, जय ज्योतिर्लिंग स्वामी।
नर्मदा द्वीप पर विराजे, ॐ स्वरूप अन्तर्यामी॥