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पंढरपुर विठ्ठल आरती — क्षेत्रीय देवता आरती

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पुंडलीक वरदे हरि विठ्ठल, श्री ज्ञानदेव तुकाराम।
पंढरी नाथ महाराज, जय जय विठ्ठल नाम॥
जय हरि विठ्ठल, जय जय विठ्ठल॥
पंढरपुर चन्द्रभागा तट, विठ्ठल मन्दिर शोभे।
काळी पायरी पर खड़े, विठोबा मन को मोहे।
नामदेवाची पायरी सुन्दर, चोखोबाची भक्ति।
संत सेना न्हावी गोरा, कुम्भार अपरम्पार शक्ति॥
जय हरि विठ्ठल, जय जय विठ्ठल॥
आषाढी एकादशी को, वारी यात्रा आती।
दिंडी पालखी में संतों की, पादुका ले जाती।
लाखों वारकरी चालत, अभंग टाळ मृदंग।
विठू माउली विठू माउली, भक्ति का अनुपम रंग॥
जय हरि विठ्ठल, जय जय विठ्ठल॥
काकड़ आरती प्रातः काल, शेज आरती रात्री।
मध्यान्ह आरती दोपहर, धूप आरती पात्री।
पंढरपुर विठ्ठल आरती, भक्ति भाव से गाओ।
पुंडलीक वरदे हरि, विठ्ठल को मन में बसाओ॥
पुंडलीक वरदे हरि विठ्ठल, श्री ज्ञानदेव तुकाराम।
पंढरी नाथ महाराज, जय जय विठ्ठल नाम॥