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जय जगन्नाथ स्वामी, नयनन पथ गामी।
पुरी धाम के नाथ प्रभु, भक्तन अन्तर्यामी॥
जय जगन्नाथ, जय बलभद्र, जय सुभद्रा मैया॥
नीलाचल पर्वत पर मन्दिर, पुरी नगर में शोभे।
बलभद्र सुभद्रा संग विराजे, तीनों दारु विग्रह सोहे।
गोल नयन बिन हाथ पैर के, विचित्र रूप निराला।
इन्द्रनीलमणि शोभा सोहे, जगन्नाथ रखवाला॥
जय जगन्नाथ, जय बलभद्र, जय सुभद्रा मैया॥
रथयात्रा विश्वप्रसिद्ध, तीन रथ निकलते।
नन्दीघोष तालध्वज पर, देव नगर में चलते।
गुण्डिचा मन्दिर तक जाते, नौ दिन रहते।
लाखों भक्त रथ खींचते, जय जयकार करते॥
जय जगन्नाथ, जय बलभद्र, जय सुभद्रा मैया॥
महाप्रसाद अभिषेक होती, छप्पन भोग लगाये।
चार धाम में पूर्व दिशा, जगन्नाथ पुरी कहलाये।
जगन्नाथ की आरती गाओ, विश्व के नाथ पुकारो।
पतित पावन दीनबन्धु, शरण हमें स्वीकारो॥
जय जगन्नाथ स्वामी, नयनन पथ गामी।
पुरी धाम के नाथ प्रभु, भक्तन अन्तर्यामी॥