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जय जय रेणुका माता, जय परशुराम जननी।
माहूर गड़ पर विराजे, तू जगत की स्वामिनी॥
जय रेणुका माता, जय रेणुका माता॥
जमदग्नि ऋषि की पत्नी, सतीत्व की मूर्ति।
परशुराम माता तुम हो, शक्ति की विभूति।
माहूर गड़ पर मन्दिर तेरा, शक्तिपीठ सोहे।
साढ़े तीन पीठों में एक, भक्त मन को मोहे॥
जय रेणुका माता, जय रेणुका माता॥
एकवीरा रूप में तुम, योद्धा शक्ति धारी।
यल्लम्मा रूप में दक्षिण, की तुम अधिकारी।
कर्नाटक महाराष्ट्र में, तेरी पूजा होती।
भक्तन की मनोकामना, तू ही पूर्ण करोती॥
जय रेणुका माता, जय रेणुका माता॥
नवरात्रि में विशेष पूजन, माहूर यात्रा सोहे।
संतान सुख धन धान्य दो माँ, कृपा दृष्टि दो।
रेणुका माता आरती करें, भक्तजन सब मिलके।
जय रेणुका माता गाओ, हृदय प्रेम से भरके॥
जय जय रेणुका माता, जय परशुराम जननी।
माहूर गड़ पर विराजे, तू जगत की स्वामिनी॥