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सब की आरती — सार्वभौमिक आरती

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सब की आरती करो, सब का मंगल गाओ।
हर प्राणी में बसे भगवान, सबको शीश नवाओ॥
सब की आरती करो, सब का मंगल गाओ॥
ब्रह्मा विष्णु महेश की, आरती उतारो।
राम कृष्ण हनुमान की, आरती उतारो।
दुर्गा लक्ष्मी सरस्वती, आरती उतारो।
गणेश कार्तिकेय शनि, सबकी आरती उतारो॥
सब की आरती करो, सब का मंगल गाओ॥
गुरुदेव की आरती, माता पिता की आरती।
सन्तों की आरती करो, साधुजनों की आरती।
जो दुखियों की सेवा करे, उनकी आरती उतारो।
परोपकारी जीवन जीवे, उनको शीश नवाओ॥
सब की आरती करो, सब का मंगल गाओ॥
नदी पहाड़ वृक्ष पशु, सबमें प्रभु का वास।
धरती माँ की आरती, जल वायु आकाश।
सृष्टि में हर कण कण में, ईश्वर का प्रकाश।
सबकी आरती उतारो, यही है प्रभु की आस॥
सब की आरती करो, सब का मंगल गाओ।
हर प्राणी में बसे भगवान, सबको शीश नवाओ॥