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स्वामिये शरणम् अयप्पा, शबरीमला वासा।
अठारह पहाड़ी के स्वामी, तू भक्तन की आशा॥
स्वामिये शरणम् अयप्पा, स्वामिये शरणम् अयप्पा॥
पम्पा गणपति से शुरू, यात्रा शबरीमला।
नीलिमला पर चढ़के भक्त, पहुँचें सन्निधानम्।
पतिनेट्टाम्पडी चढ़ने से, दर्शन होते स्वामी।
इरुमुडी बिन कोई न चढ़े, नियम है यह नामी॥
स्वामिये शरणम् अयप्पा, स्वामिये शरणम् अयप्पा॥
मकर विलक्कू दर्शन दिव्य, मकर संक्रांति ज्योति।
पोन्नम्बला मेडु से जलती, अयप्पा की ज्योति।
मण्डलकालम् पूजा विशेष, इक्यावन दिन का त्योहार।
नैय्यभिषेकम् घी का अभिषेक, अनुपम है उपहार॥
स्वामिये शरणम् अयप्पा, स्वामिये शरणम् अयप्पा॥
शबरी की तपस्या से, मला का नाम पड़ा।
अयप्पा कृपा बरसाओ, भक्तों का दुख हरो।
शबरीमला की आरती, प्रेम से सब गाओ।
स्वामिये शरणम् अयप्पा, हृदय में बसाओ॥
स्वामिये शरणम् अयप्पा, शबरीमला वासा।
अठारह पहाड़ी के स्वामी, तू भक्तन की आशा॥