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जय देवी सप्तश्रृंगी, जय जय निवासिनी।
सात शिखरों की माता, तू शक्ति स्वरूपिणी॥
जय सप्तश्रृंगी माता, जय सप्तश्रृंगी माता॥
वणी नासिक में विराजे, सप्त शिखरों पर माता।
अष्टादश भुजा शोभे, शस्त्र अस्त्र विराजता।
महिषासुर मर्दिनी रूप, सिंह पर सवारी।
लाल वस्त्र रक्त वर्णा, भक्तन हितकारी॥
जय सप्तश्रृंगी माता, जय सप्तश्रृंगी माता॥
साढ़े तीन शक्तिपीठ में, अर्ध गिनती तेरी।
नवरात्रि में शोभा छाये, भक्तों की बारी।
चैत्र नवरात्रि में विशेष, यात्रा होती भारी।
पहाड़ चढ़कर दर्शन पाते, माता की दुलारी॥
जय सप्तश्रृंगी माता, जय सप्तश्रृंगी माता॥
संतान सुख रोग निवारण, मनोकामना पूरी।
सप्तश्रृंगी माता करें कृपा, भक्ति रहे भरपूरी।
आरती उतारें माता की, दीप ज्योत जगाओ।
जय सप्तश्रृंगी निवासिनी, जय जय माता गाओ॥
जय देवी सप्तश्रृंगी, जय जय निवासिनी।
सात शिखरों की माता, तू शक्ति स्वरूपिणी॥