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जय त्र्यम्बकेश्वर देवा, जय ज्योतिर्लिंग स्वामी।
नासिक नगरी में विराजे, तू भक्तन अन्तर्यामी॥
ॐ नमः शिवाय, जय त्र्यम्बकेश्वर॥
ब्रह्मगिरि पर्वत की तलहटी, त्र्यम्बक नगर सोहे।
तीन नेत्र वाले शिव शंभु, ज्योतिर्लिंग मन मोहे।
गोदावरी नदी का उद्गम, कुशावर्त कुण्ड पवित्र।
शिव गंगा गौतमी बहती, तीर्थ अति विचित्र॥
ॐ नमः शिवाय, जय त्र्यम्बकेश्वर॥
त्र्यम्बकं यजामहे, सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्, मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महामृत्युंजय मन्त्र यहीं, शिव ने प्रकट किया।
मृत्यु पर विजय का मार्ग, जगत को शिव ने दिया।
कालसर्प शान्ति नारायण नागबली, यहीं होती विधि।
त्र्यम्बकेश्वर की कृपा से, मिटे सकल व्याधि॥
ॐ नमः शिवाय, जय त्र्यम्बकेश्वर॥
सिंहस्थ कुम्भ में स्नान पवित्र, नासिक त्र्यम्बक।
शिव पूजा अभिषेक करो, पाओ मोक्ष अभय।
त्र्यम्बकेश्वर आरती गाओ, शिव कृपा बरसे।
जय ज्योतिर्लिंग जय शम्भु, भक्त मन में बसे॥
जय त्र्यम्बकेश्वर देवा, जय ज्योतिर्लिंग स्वामी।
नासिक नगरी में विराजे, तू भक्तन अन्तर्यामी॥