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जय तुलसी माता जय तुलसी माता, हरि की प्रिय दासी।
आँगन में विराजो माता, तुम कृष्ण की वासी॥
जय तुलसी माता, जय तुलसी माता॥
वृन्दा रूप में तुम आई, विष्णु प्रिया कहलाई।
शालिग्राम संग विवाह तेरा, देवउठनी आई।
पवित्र पौधा तुलसी माता, आँगन शोभा बढ़ाये।
जहाँ तुलसी वहाँ विष्णु बसते, पाप सब मिट जाये॥
जय तुलसी माता, जय तुलसी माता॥
प्रातः काल जल चढ़ाकर, दीप जलाये सन्ध्या।
परिक्रमा करें भक्तजन, मिटे सकल अन्ध्या।
तुलसी दल बिना अधूरा, विष्णु का भोग सारा।
तुलसी माला जपें भक्त, नाम हरि का प्यारा॥
जय तुलसी माता, जय तुलसी माता॥
कार्तिक मास में पूजन, तुलसी विवाह सोहे।
गन्ने ईख से मण्डप सजे, सुभग मन को मोहे।
रोग नाशक पवित्रता, औषधि गुण तुम्हारे।
तुलसी माता कृपा बरसाओ, भक्तन के प्यारे॥
जय तुलसी माता जय तुलसी माता, हरि की प्रिय दासी।
आँगन में विराजो माता, तुम कृष्ण की वासी॥