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Vakratunda Mahakaya Aarti — वक्रतुण्ड महाकाय आरती
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वक्रतुण्ड महाकाय आरती — Vakratunda Mahakaya Aarti
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।
निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
जय वक्रतुण्ड देवा, जय महाकाय प्रभु।
सूर्यकोटि समप्रभा, सूर्यकोटि समप्रभा,
विघ्ननाशक सदा॥ जय वक्रतुण्ड देवा॥
लम्बोदर पीताम्बर, सिन्दूर वर्ण शोभे।
जय वक्रतुण्ड देवा।
एक दन्त शुभ्रा वर्ण, एक दन्त शुभ्रा वर्ण,
चन्द्रमा सम शोभे॥ जय वक्रतुण्ड देवा॥
मोदक प्रिय मोदकारी, मूषक वाहन प्यारा।
जय वक्रतुण्ड देवा।
सिद्धि बुद्धि के दाता, सिद्धि बुद्धि के दाता,
जगत में न्यारा॥ जय वक्रतुण्ड देवा॥
ॐ गं गणपतये नमः, मन्त्र तेरा पावन।
जय वक्रतुण्ड देवा।
विद्या बुद्धि के दाता, विद्या बुद्धि के दाता,
गजवदन भगवन॥ जय वक्रतुण्ड देवा॥
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी, गणेश उत्सव आये।
जय वक्रतुण्ड देवा।
दस दिन पूजन करके, दस दिन पूजन करके,
विसर्जन हो जाये॥ जय वक्रतुण्ड देवा॥
गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया।
जय वक्रतुण्ड देवा।
अगले बरस तू आजा, अगले बरस तू आजा,
पुनरागमनाय हरी ओम॥ जय वक्रतुण्ड देवा॥