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वाराणसी गंगा आरती — क्षेत्रीय देवता आरती
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जय गंगा माता काशी, दशाश्वमेध घाट।
वाराणसी की सन्ध्या आरती, दिव्य अलौकिक बात॥
गंगा माता की जय, गंगा माता की जय॥
काशी विश्वनाथ नगरी, बाबा का है धाम।
वरुणा असि के बीच बसी, वाराणसी है नाम।
दशाश्वमेध घाट पर सन्ध्या, आरती विश्व प्रसिद्ध।
पाँच पण्डित एक साथ में, करें आरती सिद्ध॥
गंगा माता की जय, गंगा माता की जय॥
सात मंजिला दीपदान, अग्नि पुष्प धूप।
एक ताल में सब घूमते, मन्त्रोच्चार अनूप।
नौकाओं में भक्त बैठे, गंगा बीच निहारे।
घाटों पर हजारों दीपक, तारों सा जगमगारे॥
गंगा माता की जय, गंगा माता की जय॥
सुबह की आरती अलग है, सन्ध्या अलग सवेरा।
काशी में मरना मोक्ष है, शिव देते बसेरा।
वाराणसी गंगा आरती, जग में है अनूठी।
देखे बिना न जाने कोई, बात यह न झूठी॥
जय गंगा माता काशी, दशाश्वमेध घाट।
वाराणसी की सन्ध्या आरती, दिव्य अलौकिक बात॥