Shri Shyama Radha Chalisa Lyrics in Hindi
॥ दोहा ॥
श्री राधे वुषभानुजा, भक्तनि प्राणाधार ।
वृन्दाविपिन विहारिणी, प्रानावौ बारम्बार ॥
जैसो तैसो रावरौ, कृष्ण प्रिया सुखधाम ।
चरण शरण निज दीजिये, सुन्दर सुखद ललाम ॥
॥ चौपाई ॥
जय वृषभान कुंवारी श्री श्यामा । कीरति नंदिनी शोभा धामा ॥
नित्य विहारिणी श्याम अधर । अमित बोध मंगल दातार ॥
रास विहारिणी रस विस्तारिन । सहचरी सुभाग यूथ मन भावनी ॥
नित्य किशोरी राधा गोरी । श्याम प्राण धन अति जिया भोरी ॥
करुना सागरी हिय उमंगिनी । ललितादिक सखियाँ की संगनी ॥
दिनकर कन्या कूल विहारिणी । कृष्ण प्रण प्रिय हिय हुल्सवानी ॥
नित्य श्याम तुम्हारो गुण गावें । श्री राधा राधा कही हर्शवाहीं ॥
मुरली में नित नाम उचारें । तुम कारण लीला वपु धरें ॥
प्रेमा स्वरूपिणी अति सुकुमारी । श्याम प्रिय वृषभानु दुलारी ॥
नावाला किशोरी अति चाबी धामा । द्युति लघु लाग कोटि रति कामा ॥
गौरांगी शशि निंदक वदना । सुभाग चपल अनियारे नैना ॥
जावक यूथ पद पंकज चरण । नूपुर ध्वनी प्रीतम मन हारना ॥
सन्तता सहचरी सेवा करहीं । महा मोड़ मंगल मन भरहीं ॥
रसिकन जीवन प्रण अधर । राधा नाम सकल सुख सारा ॥
अगम अगोचर नित्य स्वरूप । ध्यान धरत निशिदिन ब्रजभूपा ॥
उप्जेऊ जासु अंश गुण खानी । कोटिन उमा राम ब्रह्मणि ॥
नित्य धाम गोलोक बिहारिनी । जन रक्षक दुःख दोष नासवानी ॥
शिव अज मुनि सनकादिक नारद । पार न पायं सेष अरु शरद ॥
राधा शुभ गुण रूपा उजारी । निरखि प्रसन्ना हॉट बनवारी ॥
ब्रज जीवन धन राधा रानी । महिमा अमित न जय बखानी ॥
प्रीतम संग दिए गल बाहीं । बिहारता नित वृन्दावन माहीं ॥
राधा कृष्ण कृष्ण है राधा । एक रूप दौऊ -प्रीती अगाधा ॥
श्री राधा मोहन मन हरनी । जन सुख प्रदा प्रफुल्लित बदानी ॥
कोटिक रूप धरे नन्द नंदा । दरश कारन हित गोकुल चंदा ॥
रास केलि कर तुम्हें रिझावें । मान करो जब अति दुःख पावें ॥
प्रफ्फुल्लित होठ दरश जब पावें । विविध भांति नित विनय सुनावें ॥
वृन्दरंन्य विहारिन्नी श्याम । नाम लेथ पूरण सब कम ॥
कोटिन यज्ञ तपस्या करुहू । विविध नेम व्रत हिय में धरहु ॥
तू न श्याम भक्ताही अपनावें । जब लगी नाम न राधा गावें ॥
वृंदा विपिन स्वामिनी राधा । लीला वपु तुवा अमित अगाध ॥
स्वयं कृष्ण नहीं पावहीं पारा । और तुम्हें को जननी हारा ॥
श्रीराधा रस प्रीती अभेद । सादर गान करत नित वेदा ॥
राधा त्यागी कृष्ण को भाजिहैं । ते सपनेहूं जग जलधि न तरिहैं ॥
कीरति कुमारी लाडली राधा । सुमिरत सकल मिटहिं भाव बड़ा ॥
नाम अमंगल मूल नासवानी । विविध ताप हर हरी मन भवानी ॥
राधा नाम ले जो कोई । सहजही दामोदर वश होई ॥
राधा नाम परम सुखदायी । सहजहिं कृपा करें यदुराई ॥
यदुपति नंदन पीछे फिरिहैन । जो कौउ राधा नाम सुमिरिहैन ॥
रास विहारिणी श्यामा प्यारी । करुहू कृपा बरसाने वारि ॥
वृन्दावन है शरण तुम्हारी । जय जय जय व्र्शभाणु दुलारी ॥
॥ दोहा ॥
श्री राधा सर्वेश्वरी, रसिकेश्वर धनश्याम ।
करहूँ निरंतर बास मै, श्री वृन्दावन धाम ॥
॥ इति श्री राधा चालीसा ॥
Shri Shyama Radha Chalisa Meaning in Hindi
॥ दोहा ॥
- कनक बदन कुण्डल मकर, मुक्ता माला अङ्ग, पद्मासन स्थित ध्याइए, शंख चक्र के सङ्ग।
- सुनि माता राधा का स्वरूप वर्णन करें। राधा माता का रूप स्वर्णमय है, वह मकराकृति कुण्डल, मुक्तामाला से आभूषित हैं और पद्मासन में स्थित हैं, उनके साथ शंख और चक्र भी हैं।
॥ चौपाई ॥
2. जय सविता जय जयति दिवाकर, सहस्त्रांशु सप्ताश्व तिमिरहर।
- सूर्यदेव की जय हो, जो संसार को उजागर करने वाले दिवाकर हैं, और जिनकी हजारों किरणों से अंधकार दूर होता है।
- भानु पतंग मरीची भास्कर, सविता हंस सुनूर विभाकर।
- सूर्यदेव, जो पतंग और मरीची की तरह रौशन होते हैं, और जिन्हें हंस और सूर्य की तरह प्रसिद्ध विभाजन करने वाला कहा जाता है।
- विवस्वान आदित्य विकर्तन, मार्तण्ड हरिरूप विरोचन।
- विवस्वान, आदित्य, और विकर्ता सूर्य हैं। ये मार्तंड के रूप में प्रकट हुए और उनके स्वरूप को भगवान हरि के जैसा माना गया।
- अम्बरमणि खग रवि कहलाते, वेद हिरण्यगर्भ कह गाते।
- आकाश मणि के रूप में सूर्य का नाम खग और रवि है, और वेदों में इन्हें हिरण्यगर्भ कहा जाता है।
- सहस्त्रांशु प्रद्योतन, कहिकहि, मुनिगन होत प्रसन्न मोदलहि।
- सूर्यदेव के हजारों किरणों से प्रकाशित होते हुए, मुनिगण और संत उनका ध्यान करके प्रसन्न होते हैं।
- अरुण सदृश सारथी मनोहर, हांकत हय साता चढ़ि रथ पर।
- अरुण की तरह सुंदर सारथी, जो सात घोड़े वाले रथ में सवार होकर सूर्यदेव की रथ यात्रा का मार्गदर्शन करते हैं।
- मंडल की महिमा अति न्यारी, तेज रूप केरी बलिहारी।
- सूर्य के मंडल की महिमा अतुलनीय है, और उनके तेज रूप की भूरी-भूरी प्रशंसा करनी चाहिए।
- उच्चैःश्रवा सदृश हय जोते, देखि पुरन्दर लज्जित होते।
- सूर्य की आभा उच्चैःश्रवा घोड़े की तरह चमकती है, जिसे देख कर इंद्र भी लज्जित होते हैं।
- मित्र मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता सूर्य अर्क खग कलिकर।
- मित्र, मरीचि, भानु, अरुण, भास्कर, सविता, सूर्य, अर्क और खग ये सभी सूर्य के रूप हैं।
- पूषा रवि आदित्य नाम लै, हिरण्यगर्भाय नमः कहिकै।
- पूषा, रवि, आदित्य, और हिरण्यगर्भ नाम लेकर सूर्यदेव की पूजा की जाती है।
- द्वादश नाम प्रेम सों गावैं, मस्तक बारह बार नवावैं।
- सूर्य के द्वादश नामों का प्रेम से गायन करें और मस्तक बारह बार झुका कर श्रद्धा से प्रणाम करें।
- चार पदारथ जन सो पावै, दुःख दारिद्र अघ पुंज नसावै।
- सूर्य की पूजा से चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) प्राप्त होते हैं, और दुख, दरिद्रता, और पाप समाप्त हो जाते हैं।
- नमस्कार को चमत्कार यह, विधि हरिहर को कृपासार यह।
- सूर्यदेव को नमस्कार करने से चमत्कार होते हैं, यह विधि भगवान हरि और हर का कृपा प्रसार करती है।
- सेवै भानु तुमहिं मन लाई, अष्टसिद्धि नवनिधि तेहिं पाई।
- जो लोग मन से सूर्यदेव की पूजा करते हैं, उन्हें आठ सिद्धियाँ और नौ निधियाँ प्राप्त होती हैं।
- बारह नाम उच्चारन करते, सहस जनम के पातक टरते।
- सूर्य के बारह नामों का उच्चारण करने से एक हजार जन्मों के पाप समाप्त हो जाते हैं।
- उपाख्यान जो करते तवजन, रिपु सों जमलहते सोतेहि छन।
- जो लोग सूर्यदेव के उपाख्यान (कहानियाँ) सुनते हैं, वे शत्रु और पाप से मुक्त हो जाते हैं।
- धन सुत जुत परिवार बढ़तु है, प्रबल मोह को फंद कटतु है।
- सूर्य की पूजा से धन, संतान, परिवार में वृद्धि होती है, और मोह का बंधन कटता है।
- अर्क शीश को रक्षा करते, रवि ललाट पर नित्य बिहरते।
- सूर्यदेव की पूजा से व्यक्ति की रक्षा होती है और सूर्य हमेशा उसके मस्तक पर रहता है।
- सूर्य नेत्र पर नित्य विराजत, कर्ण देस पर दिनकर छाजत।
- सूर्यदेव हमेशा नेत्रों में बिराजते हैं और उनके कानों पर दिनकर की आभा रहती है।
- भानु नासिका वासकरहुनित, भास्कर करत सदा मुखको हित।
- सूर्य की पूजा से नाक और मुख को हमेशा शुभता मिलती है।
- ओंठ रहें पर्जन्य हमारे, रसना बीच तीक्ष्ण बस प्यारे।
- सूर्य के साथ ओंठों और रसना में मीठा और तेज रूप रहता है।
- कंठ सुवर्ण रेत की शोभा, तिग्म तेजसः कांधे लोभा।
- सूर्य के साथ गहनों और शरीर में सुख और तेज का प्रभाव रहता है।
- पूषां बाहू मित्र पीठहिं पर, त्वष्टा वरुण रहत सुउष्णकर।
- सूर्य के हाथों में शक्ति और शरीर में सुष्मिता रहती है।
- युगल हाथ पर रक्षा कारन, भानुमान उरसर्म सुउदरचन।
- सूर्य देव के दोनों हाथ सुरक्षा करते हैं, और उनके शरीर का निर्मल रूप रहता है।
- बसंत नाभि आदित्य मनोहर, कटिमंह, रहत मन मुदभर।
- सूर्य की नाभि में सुंदरता और मन में खुशी की स्थिति रहती है।
- जंघा गोपति सविता बासा, गुप्त दिवाकर करत हुलासा।
- सूर्यदेव की जंघा में गोकुल की रचनाएं होती हैं, और वे दिवाकर से हर्षित रहते हैं।
- विवस्वान पद की रखवारी, बाहर बसते नित तम हारी।
- विवस्वान सूर्य के चरणों की रक्षा करते हैं और बाहर अंधकार को नष्ट करते हैं।
- सहस्त्रांशु सर्वांग सम्हारै, रक्षा कवच विचित्र विचारे।
- सूर्यदेव अपने हजारों किरणों से सब अंगों की रक्षा करते हैं।
- अस जोजन अपने मन माहीं, भय जगबीच करहुं तेहि नाही।
- जो अपने मन में सूर्यदेव का ध्यान करता है, वह संसार में किसी भी भय से मुक्त हो जाता है।
- दद्रु कुष्ठ तेहिं कबहु न व्यापै, जोजन याको मन माहीं जापै।
- जो सूर्य का जाप करता है, उस पर कुष्ठ रोग कभी नहीं आता।
- अंधकार जग का जो हरता, नव प्रकाश से आनंद भरता।
- सूर्य अंधकार को हरता है और नए प्रकाश से संसार को आनंदित करता है।
- ग्रह गन ग्रसि न मिटावत जाही, कोटि बार मैं प्रनवौं ताही।
- सूर्य ग्रहों के प्रभाव को समाप्त करता है, और मैं बार-बार सूर्य को प्रणाम करता हूँ।
- मंद सदृश सुत जग में जाके, धर्मराज सम अद्भुत बांके।
- सूर्य का रूप दुनिया में ऐसा है, जैसे धर्मराज का रूप अद्भुत हो।
- धन्य-धन्य तुम दिनमनि देवा, किया करत सुरमुनि नर सेवा।
- सूरज की पूजा से ही देवता, मुनि, और मानव सेवा प्राप्त करते हैं।
- भक्ति भावयुत पूर्ण नियम सों, दूर हटतसो भवके भ्रम सों।
- सूर्य की भक्ति से मनुष्य के भ्रम और संसार के बंधनों से मुक्ति मिलती है।
- परम धन्य सों नर तनधारी, हैं प्रसन्न जेहि पर तम हारी।
- वह व्यक्ति परम धन्य होता है जो सूर्य की भक्ति करता है, और जिसके मन में अंधकार नष्ट हो जाता है।
- अरुण माघ महं सूर्य फाल्गुन, मधु वेदांग नाम रवि उदयन।
- सूर्य देव माघ और फाल्गुन के महीने में विशेष रूप से उदय होते हैं, जैसे मधु और वेदांगों के रूप में।
- भानु उदय बैसाख गिनावै, ज्येष्ठ इन्द्र आषाढ़ रवि गावै।
- भानु सूर्य के उदय के समय बैसाख और ज्येष्ठ महीने में सूर्य देव का उदय विशेष होता है।
- यम भादों आश्विन हिमरेता, कातिक होत दिवाकर नेता।
- यम और आश्विन के महीने में सूर्य के तेज से दुनिया में हर तरफ रोशनी फैलती है।
- अगहन भिन्न विष्णु हैं पूसहिं, पुरुष नाम रविहैं मलमासहिं।
- पूस महीने में सूर्य विष्णु के रूप में प्रकट होते हैं और उनका नाम मलमास में लिया जाता है।
॥ दोहा ॥
42. भानु चालीसा प्रेम युत, गावहिं जे नर नित्य, सुख सम्पत्ति लहि बिबिध, होंहिं सदा कृतकृत्य। – जो लोग प्रेमपूर्वक भानु चालीसा गाते हैं, उन्हें हर प्रकार की सुख और सम्पत्ति मिलती है और वे सदा कृतकृत्य रहते हैं।
Shri Shyama Radha Chalisa Lyrics in English
॥ DOHA ॥
Kanak badan kundal makar, mukta mala ang, padmasan sthit dhyaiye, shankh chakra ke sang.
॥ CHAUPAI ॥
Jai Savita Jai Jayati Divakar, Sahastranshu Saptashv Timirhar.
Bhanu Patang Marichi Bhaskar, Savita Hans Sunur Vibhaakar.
Vivaswan Aditya Vikartan, Martand Harirup Virochan.
Ambermani Khag Ravi Kahlate, Ved Hiranyagarbha Kah Gaate.
Sahastranshu Pradyotan, Kahikahi, Munigan Hot Prasann Modalhi.
Arun Sadrish Saarthi Manohar, Haankat Hay Sata Chadh Rath Par.
Mandala Ki Mahima Ati Nyari, Tej Roop Keri Balihari.
Ucchaishrava Sadrish Hay Jote, Dekhi Indra Lajjit Hote.
Mitra Marichi, Bhanu, Arun, Bhaskar, Savita Surya Ark Khag Kalikar.
Pusha Ravi Aditya Naam Lai, Hiranyagarbhay Namah Kahike.
Dwadash Naam Prem Se Gaavein, Mastak Barah Bar Nawaavein.
Chaar Padarth Jan So Paavein, Dukh Daridra Agh Puj Nasavein.
Namaskar Ko Chamatkar Yah, Vidhi Harihar Ko Kripasaar Yah.
Sevai Bhanu Tumhin Man Lai, Ashtasiddhi Navnidhi Tehin Pai.
Barah Naam Uchharan Karte, Sahas Janam Ke Patak Tarte.
Upakhyan Jo Karte Tavajan, Ripu Son Jamalhete Sotehin Chan.
Dhan Sut Jut Parivar Badhatu Hai, Prabal Moh Ko Phand Katatu Hai.
Ark Sheesh Ko Raksha Karte, Ravi Lalat Par Nity Biharte.
Surya Netra Par Nity Virajat, Karn Desh Par Dinkar Chhajat.
Bhanu Nasika Vaskarahunit, Bhaskar Kart Sada Mukhko Hit.
Onth Rahen Parjanya Hamare, Rasna Beech Teekshn Bas Pyare.
Kanth Suvarn Ret Ki Shobha, Tigm Tejasah Kandhe Lobhah.
Pusha Bahu Mitra Peeth Par, Twashta Varun Rehat Suushnkar.
Yugal Hath Par Raksha Karan, Bhanu Man Ursm Soodarchan.
Basant Nabhi Aditya Manohar, Katimah, Rehat Man Mudbhar.
Jangha Gopati Savita Basa, Gupt Divakar Karta Hulasa.
Vivaswan Pad Ki Rakhwari, Bahar Basate Nit Tam Hari.
Sahastranshu Sarvang Samhare, Raksha Kavach Vichitra Vichare.
As Yojan Apne Man Mahin, Bhay Jagbeech Karhun Tehi Nahi.
Dadru Kusht Tehin Kabhu N Vyapai, Yojan Yako Man Mahin Japai.
Andhkar Jag Ka Jo Harta, Nav Prakash Se Anand Bharta.
Grah Gan Gras N Mitavat Jahi, Koti Bar Main Pranvon Tahi.
Mand Sadri Sut Jag Mein Jaake, Dharmaraj Sam Adbhut Banke.
Dhanya-Dhanya Tum Dinmani Deva, Kiya Kart Surmuni Nar Seva.
Bhakti Bhavyut Purn Niyam Son, Door Hattatso Bhavke Bhram Son.
Param Dhanya Son Nar Tandhari, Hain Prasann Jehi Par Tam Hari.
Arun Magh Mah Surya Falgun, Madhu Vedang Naam Ravi Udayan.
Bhanu Uday Vaisakh Ginavai, Jyeshtha Indra Ashadh Ravi Gaavai.
Yam Bhado Ashwin Himreta, Katik Hot Divakar Neta.
Aghan Bhinn Vishnu Hai Pusahin, Purush Naam Ravihai Malmasin.
॥ DOHA ॥
Bhanu Chaleesa Prem Yut, Gaavein Je Nar Nitya, Sukh Sampatti Lahi Bibidh, Hon Hamesha Krutkritya.
Shri Shyama Radha Chalisa Meaning in Hindi
॥ DOHA ॥
Kanak badan kundal makar, mukta mala ang, padmasan sthit dhyaiye, shankh chakra ke sang.
Meditate on the one who has a golden body, wearing a fish-shaped earring, a pearl necklace, and sits in the Padmasana posture with the conch and chakra in hand.
॥ CHAUPAI ॥
Jai Savita Jai Jayati Divakar, Sahastranshu Saptashv Timirhar.
Victory to Savita (the Sun), the radiant one, the remover of darkness with thousand rays and seven horses.
Bhanu Patang Marichi Bhaskar, Savita Hans Sunur Vibhaakar.
The Sun, the one who burns like a firefly, the one who shines brightly, and the one who is revered by birds and swans.
Vivaswan Aditya Vikartan, Martand Harirup Virochan.
The Sun God, who is bright like a torch, the eternal source of light, and the one who takes the form of Lord Vishnu.
Ambermani Khag Ravi Kahlate, Ved Hiranyagarbha Kah Gaate.
The Sun, called the jewel of the sky, who is praised by the Vedas and the golden embryo.
Sahastranshu Pradyotan, Kahikahi, Munigan Hot Prasann Modalhi.
With thousands of rays, he brightens everything, making saints and sages happy and peaceful.
Arun Sadrish Saarthi Manohar, Haankat Hay Sata Chadh Rath Par.
The charioteer with a beautiful complexion, riding a seven-horse chariot, shining brightly.
Mandala Ki Mahima Ati Nyari, Tej Roop Keri Balihari.
The magnificence of the Sun’s circle is unmatched, with its radiant form which is beyond comparison.
Ucchaishrava Sadrish Hay Jote, Dekhi Indra Lajjit Hote.
The Sun’s rays shine like the mighty horse Uchhaishrava, making Indra (King of Gods) feel humbled.
Mitra Marichi, Bhanu, Arun, Bhaskar, Savita Surya Ark Khag Kalikar.
Mitra, Marichi, Bhanu, Arun, Bhaskar, Savita, Sun, Ark, and birds praise the Sun.
Pusha Ravi Aditya Naam Lai, Hiranyagarbhay Namah Kahike.
Pusha, Ravi, Aditya, take the name of the Sun, and bow to Hiranyagarbha (Golden Embryo).
Dwadash Naam Prem Se Gaavein, Mastak Barah Bar Nawaavein.
Those who sing the twelve names of the Sun with love, bow down to it twelve times.
Chaar Padarth Jan So Paavein, Dukh Daridra Agh Puj Nasavein.
By chanting the twelve names, one attains the fourfold goals of life, and all miseries, poverty, and sins are eradicated.
Namaskar Ko Chamatkar Yah, Vidhi Harihar Ko Kripasaar Yah.
This form of worship is a miracle, and it is the source of divine grace for Lord Vishnu and Lord Shiva.
Sevai Bhanu Tumhin Man Lai, Ashtasiddhi Navnidhi Tehin Pai.
By serving and remembering the Sun, one gains the eight siddhis and nine treasures.
Barah Naam Uchharan Karte, Sahas Janam Ke Patak Tarte.
Chanting these twelve names erases the sins accumulated over a thousand lifetimes.
Upakhyan Jo Karte Tavajan, Ripu Son Jamalhete Sotehin Chan.
Those who narrate the story of the Sun with devotion, will be freed from all obstacles and enemies.
Dhan Sut Jut Parivar Badhatu Hai, Prabal Moh Ko Phand Katatu Hai.
Wealth, sons, family, and everything prosper, and the strong entanglements of attachment are cut off.
Ark Sheesh Ko Raksha Karte, Ravi Lalat Par Nity Biharte.
The Sun protects all, and he shines continuously on the forehead of the world.
Surya Netra Par Nity Virajat, Karn Desh Par Dinkar Chhajat.
The Sun’s rays always shine brightly, spreading light all over, including on the ears and the lands.
Bhanu Nasika Vaskarahunit, Bhaskar Kart Sada Mukhko Hit.
The Sun’s light always benefits the nose and brings good to the face.
Onth Rahen Parjanya Hamare, Rasna Beech Teekshn Bas Pyare.
The lips remain moist with pleasant air, and the tongue remains sharp with sweetness.
Kanth Suvarn Ret Ki Shobha, Tigm Tejasah Kandhe Lobhah.
The throat shines like golden sand, and the shoulder is filled with intense radiance and attraction.
Pusha Bahu Mitra Peeth Par, Twashta Varun Rehat Suushnkar.
The Sun’s arms and back bring warmth and light, bringing benefits from Varun (the God of water) and Tvashta (the creator).
Yugal Hath Par Raksha Karan, Bhanu Man Ursm Soodarchan.
With his pair of hands, the Sun protects and offers solace, giving peace to the heart.
Basant Nabhi Aditya Manohar, Katimah, Rehat Man Mudbhar.
The Sun shines from the center of the universe and fills the mind with joy and satisfaction.
Jangha Gopati Savita Basa, Gupt Divakar Karta Hulasa.
The Sun rests in the thighs, and the secret forces of the universe follow its rhythms.
Vivaswan Pad Ki Rakhwari, Bahar Basate Nit Tam Hari.
Vivaswan (the Sun) guards his seat and keeps away the darkness with eternal light.
Sahastranshu Sarvang Samhare, Raksha Kavach Vichitra Vichare.
With his thousands of rays, the Sun protects and provides a divine shield to all.
As Yojan Apne Man Mahin, Bhay Jagbeech Karhun Tehi Nahi.
Anyone who meditates on the Sun’s divine form will have no fear in this world.
Dadru Kusht Tehin Kabhu N Vyapai, Yojan Yako Man Mahin Japai.
People will never suffer from leprosy if they chant these names with devotion.
Andhkar Jag Ka Jo Harta, Nav Prakash Se Anand Bharta.
The Sun removes all darkness and fills the world with new light and joy.
Grah Gan Gras N Mitavat Jahi, Koti Bar Main Pranvon Tahi.
The Sun absorbs and nullifies all the negative influences of planets and grants protection.
Mand Sadri Sut Jag Mein Jaake, Dharmaraj Sam Adbhut Banke.
Like a child, the Sun is the source of light, leading all to righteousness.
Dhanya-Dhanya Tum Dinmani Deva, Kiya Kart Surmuni Nar Seva.
Blessed are you, Sun, as you are worshipped by the gods, saints, and all living beings.
Bhakti Bhavyut Purn Niyam Son, Door Hattatso Bhavke Bhram Son.
Through devotion and following proper rituals, one can free oneself from the illusion of worldly life.
Param Dhanya Son Nar Tandhari, Hain Prasann Jehi Par Tam Hari.
The person who holds the Sun in their heart is truly blessed and will be pleased by the Sun’s radiance.
Arun Magh Mah Surya Falgun, Madhu Vedang Naam Ravi Udayan.
The Sun shines brightly in the months of Magh and Falgun, symbolizing auspiciousness.
Bhanu Uday Vaisakh Ginavai, Jyeshtha Indra Ashadh Ravi Gaavai.
In Vaisakh and Ashadh, the Sun rises with great significance and fulfills all needs.
Yam Bhado Ashwin Himreta, Katik Hot Divakar Neta.
In the months of Bhadon and Ashwin, the Sun continues to lead, bringing warmth and strength.
Aghan Bhinn Vishnu Hai Pusahin, Purush Naam Ravihai Malmasin.
The Sun holds special significance in Aghan, as it carries the name of Vishnu and is revered during Malmas.
॥ DOHA ॥
Bhanu Chaleesa Prem Yut, Gaavein Je Nar Nitya, Sukh Sampatti Lahi Bibidh, Hon Hamesha Krutkritya.
Those who sing the Sun Chalisa with love and devotion will always be blessed with prosperity, happiness, and fulfillment of all desires.