Mahabharata Adi Parva Shloka 8957
Shloka (श्लोक)
महाराज विजानीहि यत तवां वक्ष्यामि तच छृणु
मुमूर्षॊर औषधम इव न रॊचेतापि ते शरुतम
⚡ Quick Meaning
यह श्लोक विदुर की ओर से राजा को दी जाने वाली सलाह का संकेत देता है।
📖 Translations
English Translation
This shloka illustrates how Vidura, addressing the king, warns him with advice that, like medicine for a dying person, may not be pleasing but is essential for well-being.
हिंदी अनुवाद
यह श्लोक विदुर द्वारा राजा को दिए जाने वाले एक चेतावनी और सलाह का संकेत देता है, जो एक मृतवृत्ति पर लटका हुआ व्यक्ति के लिए औषधि की तरह महत्वपूर्ण है।
🔍 Commentary
📜 Context
श्लोक में विदुर, राजा को सलाह देने का प्रयास कर रहा है, जो सही मार्ग दिशा दिखाने की कोशिश करता है।
🧘 Meaning
यह सलाह निस्संदेह कठिन हो सकती है, लेकिन इस प्रकार के मार्गदर्शन में गहन सत्य और लाभ छुपा होता है।
🌟 Application
सत्य और लाभ की पहचान हमें कठिन निर्णय लेने में मदद करती है, जो दीर्घकालिक परिणामों के लिए अनिवार्य है।
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