Mahabharata Udyoga Parva – अपश्यं कृष्ण पृथिवीं धार्तराष्ट्रानुशासनात

Shloka (श्लोक)
अपश्यं कृष्ण पृथिवीं धार्तराष्ट्रानुशासनात
पूर्णां हस्तिगवाश्वस्य वार्ष्णेय न तु तच चिरम
⚡ Quick Meaning
मैंने कृष्ण को धरती पर देखा, लेकिन यह क्षण लंबे समय तक नहीं रहा।
Translations
English Translation
Under the decree of Dhritarashtra, I witnessed Krishna on this earth, yet that moment was fleeting. This verse reflects the transient nature of life and divine presence.
हिंदी अनुवाद
धृतराष्ट्र के आदेश के अधीन, मैंने कृष्ण को धरती पर देखा, लेकिन वह क्षण क्षणिक था। यह श्लोक जीवन की तात्कालिकता और दिव्य उपस्थिति को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक दुर्योधन के दृष्टिकोण से कृष्ण की महत्ता और क्षणिक अनुभव को प्रस्तुत करता है।
Meaning
आध्यात्मिक अनुभव अक्सर क्षणिक होते हैं, फिर भी उनके दीर्घकालिक प्रभाव हो सकते हैं।
Application
हमें अपने जीवन में प्रत्येक क्षण का मूल्य समझना चाहिए और पल का सम्मान करना चाहिए।
