Mahabharata Udyoga Parva – तम अपृच्छन महाकायं परह्रादः कॊ भवान इति

Shloka (श्लोक)
तम अपृच्छन महाकायं परह्रादः कॊ भवान इति
परत्याह ननु शीलॊ ऽसमि तयक्तॊ गच्छाम्य अहं तवया
⚡ Quick Meaning
परह्राद ने उस विशाल रूप वाले को पूछा, “आप कौन हैं?” और बताया कि वह शील से टकराए बिना यहां आया है।
Translations
English Translation
Inquiring the great entity before him, Prahlada questions his identity and asserts his devotion. His quest reflects the essence of seeking understanding and expressing humility even in the face of divine power.
हिंदी अनुवाद
उसके समक्ष महानता से भरे हुए प्राण के बारे में पूछते हुए, परह्राद ने उसकी पहचान जानने की कोशिश की। यही भक्ति का वास्तविक स्वरूप है।
Commentary
Context
यह श्लोक भक्ति और विनम्रता का मिश्रित स्वरूप प्रदर्शित करता है, यहां परह्राद चिंता में ईश्वर से पूछते हैं।
Meaning
यह दर्शाता है कि सच्ची भक्ति स्वयं की पहचान और ईश्वर को समझने के लिए होती है।
Application
यह हमें सिखाता है कि हमें हमेशा विनम्र रहकर अपने प्रश्न पूछने चाहिए और समझने का प्रयास करना चाहिए।
