Mahabharata Adi Parva Shloka 1107
Shloka (श्लोक)
किमर्थं भगवन घॊरा महॊत्पाताः समुत्थिताः
न च शत्रुं परपश्यामि युधि यॊ नः परधर्षयेत
⚡ Quick Meaning
भगवान से पूछा जाता है कि इतना भयंकर प्रलय क्यों हो रहा है, जब कोई प्रतिकूलता नहीं दिखती।
📖 Translations
English Translation
The speaker questions the Lord about the fierce calamities that have arisen, stating that they perceive no enemy who could challenge them. This evokes concern about the unprovoked nature of such turmoil.
हिंदी अनुवाद
वक्ता भगवान से पूछता है कि ये भयंकर प्रलय क्यों उत्पन्न हो रहे हैं, जबकि उन्हें कोई ऐसा शत्रु नहीं दिखाई देता जो उन्हें चुनौती दे सके। यह बिना कारण के आ रहे संकटों पर चिंता व्यक्त करता है।
🔍 Commentary
📜 Context
यह श्लोक आदिपर्व के श्लोक 1108 में है, जिसमें देवताओं से संकट के कारण पूछते हैं।
🧘 Meaning
यह प्रश्न विश्वास और असमंजस का मिश्रण दर्शाता है, जहां भगवान की सहायता का आह्वान किया जा रहा है।
🌟 Application
यह श्लोक हमें सिखाता है कि जब विपत्तियाँ आती हैं, तो हमें भगवान से मार्गदर्शन प्राप्त करने की आवश्यकता होती है।
