Mahabharata Adi Parva Shloka 2736
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Shloka (श्लोक)
अथ तं देशम अभ्यागाद ययातिर नहुषात्मजः
शरान्तयुग्यः शरान्तहयॊ मृगलिप्सुः पिपासितः
⚡ Quick Meaning
ययाति, नहुष का पुत्र, एक प्यासे हिरण की तलाश में एक स्थान पर पहुँचा।
📖 Translations
English Translation
Yayati, the son of Nahusha, arrived at that region. He was thirsty and looking for a deer, reminiscent of an era where all creatures were at peace.
हिंदी अनुवाद
ययाति, नहुष का पुत्र, उस क्षेत्र में पहुँचा। वह प्यासा था और शांति के युग की याद दिलाते हुए हिरण की तलाश में था।
🔍 Commentary
📜 Context
यह श्लोक आदिपर्व का हिस्सा है जो ययाति की यात्रा का वर्णन करता है, जो नहुष का पुत्र है।
🧘 Meaning
यहाँ ययाति की प्यास और हिरण की खोज व्यक्त की जा रही है, जो कि प्राकृतिक निष्कर्षण का प्रतीक है।
🌟 Application
यायाति की यात्रा हमें यह सिखाती है कि कभी-कभी हमें अपने जीवन के अस्तित्व की तलाश में स्थलों पर जाना पड़ता है।
