Mahabharata Adi Parva Shloka 3796
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Shloka (श्लोक)
परमृद्य परराष्ट्राणि कृतार्थं पुनरागतम
पुत्रम आसाद्य भीष्मस तु हर्षाद अश्रूण्य अवर्तयत
⚡ Quick Meaning
भीष्म ने अपने बेटे को हर्षित होकर गले लगाया।
📖 Translations
English Translation
Bhishma, overwhelmed with joy, embraced his son upon his return, marking a significant reunion. His emotions reflected the deep love and affection between them, resonating with the fulfillment of familial ties amidst the backdrop of a grand gathering.
हिंदी अनुवाद
भीष्म ने अपने बेटे के लौटने पर खुशी से उसे गले लगाया, जो एक महत्वपूर्ण पुनर्मिलन था। उनकी भावनाएँ पारिवारिक संबंधों की गहनता को दर्शाती थीं, जो एक भव्य समारोह के बीच में थी।
🔍 Commentary
📜 Context
यह श्लोक आदिपर्व का है, जहाँ भीष्म ने अपने पुत्र का स्वागत किया। यह उनके पारिवारिक संबंधों की गहराई को दर्शाता है।
🧘 Meaning
इस श्लोक का अर्थ है कि परिवार में प्रेम और समर्थन कितना महत्वपूर्ण होता है।
🌟 Application
यह हमें यह सिखाता है कि परिवार के सदस्यों का स्वागत करना और प्यार जताना कैसे संबंधों को मजबूत बनाता है।
