Mahabharata Udyoga Parva – इन्द्रयाणीन्द्रियार्थेभ्यः परियेभ्यः संनिवर्त्य सः

Shloka (श्लोक)
इन्द्रयाणीन्द्रियार्थेभ्यः परियेभ्यः संनिवर्त्य सः
कषुत्पिपासा तप सहः कृशॊ धमनि संततः
देवम आराधयच छर्वं गृणन बरह्म सनातनम
⚡ Quick Meaning
सभी इच्छाओं पर नियंत्रण रखते हुए, उसने दिव्य ब्रह्म को प्राप्त किया।
Translations
English Translation
By restraining his senses from their objects, he, enduring hunger and thirst, remained thin but focused, worshipping the eternal Brahman while chanting his verses, underscoring the importance of self-restraint in spiritual pursuits.
हिंदी अनुवाद
अपने इंद्रियों को उनके आदर्शों से रोकते हुए, उसने भूख और प्यास सहते हुए सन्निपात रखा, जबकि शाश्वत ब्रह्म की पूजा करते हुए अपने श्लोकों का जप किया। यह आध्यात्मिक प्रयासों में आत्म-नियंत्रण के महत्व को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक तपस्या और आत्म-नियंत्रण की गहराई को दर्शाता है, जिसका महत्व महाभारत में प्रमुख है।
Meaning
यह सिखाता है कि भौतिक इच्छाओं पर संयमित रहना आध्यात्मिक विकास के लिए आवश्यक है।
Application
हमारी इच्छा नियंत्रण हमें अधिक आध्यात्मिकता की ओर ले जा सकता है और हमें संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देता है।
