Mahabharata Udyoga Parva – किं दत्तं हुतम इष्टं वा सुतप्तम अथ वा तपः

Shloka (श्लोक)
किं दत्तं हुतम इष्टं वा सुतप्तम अथ वा तपः
सिन्धुराजेन येनैकः करुद्धान पार्थान अवारयत
⚡ Quick Meaning
क्या दिया गया, क्या जलाया गया, या तपस्या की गई?
Translations
English Translation
Whether it is a gift, or a sacrifice, or an intense penance, it is significant that the king of the Sindhu, displaying his wrath, managed to block the Pandavas, indicating his determination.
हिंदी अनुवाद
चाहे वह कोई उपहार हो, या बलिदान, या तीव्र तप, यह महत्वपूर्ण है कि सिंधु का राजा, अपनी क्रोधिता दर्शाते हुए, पाण्डवों को रोकने में सफल रहा।
Commentary
Context
यह युद्ध की स्थिति में सिद्धांतों की गहराई को दिखाता है जब जयद्रथ ने अपनी शक्ति को तैनात किया। यह शक्ति दिखाने की प्रक्रिया को दर्शाता है।
Meaning
यह श्लोक हमें सिखाता है कि कभी-कभी ज्ञान और तपस्या का फल हमारी इच्छाएँ पूरी करने में महत्वपूर्ण होता है।
Application
हमें अपने जीवन में संघर्षों का सामना करने तथा अपनी इच्छाओं के प्रति प्रतिबद्ध रहने की प्रेरणा मिलती है।
