Mahabharata Udyoga Parva – ततः परीतश च दैत्येन्द्रॊ भयं चास्याभवन महत

Shloka (श्लोक)
ततः परीतश च दैत्येन्द्रॊ भयं चास्याभवन महत
वरे परदिष्टे विप्रेण नाल्पतेजायम इत्य उत
⚡ Quick Meaning
दैत्यराज चिंतित होते हैं कि वह वर देने के बाद किसी प्रकार की समस्या में न पड़ जाए।
Translations
English Translation
The demon king, feeling both joy and fear, reflects on the implications of granting the boon. He fears that offering such a boon could lead to unexpected difficulties, showing the tension between exhilaration and caution in his role.
हिंदी अनुवाद
दैत्यराज, खुशी और भय का अनुभव करते हुए, वर देने के परिणामों के बारे में सोचते हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा वर देने से अनपेक्षित कठिनाइयाँ आ सकती हैं।
Commentary
Context
इस श्लोक में दैत्यराज की आंतरिक संघर्ष को दर्शाया गया है, जब वह वर देने पर विचार कर रहा है।
Meaning
यह श्लोक अवसर और परिणाम के बीच की जटिलता को स्पष्ट करता है, जहाँ निर्णय का वजन होता है।
Application
यह हमें यह सिखाता है कि हर निर्णय का परिणाम हो सकता है, इसलिए सावधानी से विचार करना चाहिए।
