Mahabharata Udyoga Parva – दिव्यज्ञानबलॊपेता गान्धारी च यशस्विनी

Shloka (श्लोक)
दिव्यज्ञानबलॊपेता गान्धारी च यशस्विनी
ददर्श पुत्रांस तान सर्वान ये चान्ये ऽपि रणे हताः
⚡ Quick Meaning
गान्धारी ने दिव्य ज्ञान से परिपूर्ण होकर सभी पुत्रों को देखा।
Translations
English Translation
Having attained divine knowledge, Gandhari beheld all her sons, including those who were killed in battle. This moment emphasized her connection to both her living and deceased children, representing her profound maternal instincts amidst loss.
हिंदी अनुवाद
दिव्य ज्ञान को प्राप्त कर गान्धारी ने अपने सभी पुत्रों को देखा, जिनमें युद्ध में मारे गए भी शामिल थे। यह क्षण उनके जीवित और मृत दोनों बच्चों के साथ उनके गहरे मातृत्व संबंध को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक गान्धारी के दिव्य दृष्टि प्राप्त करने का उल्लेख करता है, जो उनके मातृत्व की गहराई को अभिव्यक्त करता है।
Meaning
गान्धारी का अपने पुत्रों को देखने का अनुभव एक गहन मातृ प्रेम का प्रतीक है, जो जीवन और मृत्यु के पार जाता है।
Application
इस श्लोक से हम सीख सकते हैं कि माता का प्रेम कभी समाप्त नहीं होता, चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी कठिन क्यों न हों।
