Mahabharata Udyoga Parva – पितामहस्य सरसः परवृत्तासि सरस्वति

Shloka (श्लोक)
पितामहस्य सरसः परवृत्तासि सरस्वति
वयाप्तं चेदं जगत सर्वं तवैवाम्भॊभिर उत्तमैः
⚡ Quick Meaning
संपूर्ण जगत का विस्तार माता सरस्वती के जल के माध्यम से है।
Translations
English Translation
The universe is described as being filled by the waters of Saraswati, revered as the motherly figure, whose excellence pervades everything. This highlights the nurturing aspect of nature and how it sustains life.
हिंदी अनुवाद
इस श्लोक में कहा गया है कि संपूर्ण जगत माता सरस्वती के जल के माध्यम से भरा है, जो एक मातृात्मकता की पहचान है और यह जीवन की रक्षा करती है।
Commentary
Context
यह श्लोक शल्य पर्व में आता है, जहाँ सरस्वती देवी की महिमा का बखान किया गया है।
Meaning
यहाँ सरस्वती को समस्त सृष्टि का पोषण करने वाली शक्ति के रूप में प्रस्तुत किया जाता है।
Application
विभिन्न शास्त्रों में जल के प्रबंधन और सरस्वती की आराधना के महत्व को दर्शाते हुए, इसे आज भी आधुनिक संदर्भों में लागू किया जा सकता है।
