Mahabharata Vana Parva – अथॊपॊष्य शिरःस्नाता दैवतान्य अभिगम्य सा
Shloka (श्लोक)
अथॊपॊष्य शिरःस्नाता दैवतान्य अभिगम्य सा
हुत्वाग्निं विधिवद विप्रान वाचयाम आस पर्वणि
⚡ Quick Meaning
सावित्री ने विधिपूर्वक अग्नि को समर्पित कर ब्राह्मणों को बुलाया।
Translations
English Translation
Having performed her ablutions and offered her prayers to the deities, Savitri dutifully called upon the Brahmins to offer sacrificial rites, adhering to the sacred traditions with devotion.
हिंदी अनुवाद
अपने स्नान के बाद और देवताओं को भेंट अर्पित करने के बाद, सावित्री ने ब्राह्मणों को बलिप्रदान के लिए निमंत्रित किया, श्रद्धा से पवित्र परंपराओं को अपनाते हुए।
Commentary
Context
इस श्लोक का उल्लेख सावित्री द्वारा धार्मिक अनुष्ठान को पूरा करने के लिए किया गया है, जो एक महत्वपूर्ण कार्य है।
Meaning
यह श्लोक प्रदर्शित करता है कि श्रद्धा और भक्ति से किए गए कार्य, देवताओं के प्रति कृतज्ञता को व्यक्त करते हैं।
Application
सावित्री के इस कार्य से हमें यह सिखने को मिलता है कि श्रद्धापूर्वक किए गए कार्य हमें अपने जीवन में ऊँचाई देने में सहायक होते हैं।
