Mahabharata Vana Parva – कृत्वैव कर्माणि महानि शूरास; तपॊ दमाचार विहारशीलाः
Shloka (श्लोक)
कृत्वैव कर्माणि महानि शूरास; तपॊ दमाचार विहारशीलाः
देवान ऋषीन परेतगणांश च सर्वान; संतर्पयित्वा विधिना परेण
⚡ Quick Meaning
शूर और तपस्वियों को अपने कर्म द्वारा संतुष्ट करें।
Translations
English Translation
This shloka emphasizes the importance of pleasing the divine beings and sages through our actions and virtuous conduct. It suggests that by upholding righteousness and engaging in meaningful deeds, one can earn favor and fulfill their duties to ensure spiritual growth.
हिंदी अनुवाद
यह श्लोक यह बताता है कि हमें अपने कार्यों और सद्गुणों के माध्यम से दिव्य beings और ऋषियों को संतुष्ट करना चाहिए। यह दर्शाता है कि धर्म का पालन करने और सार्थक कार्यों में संलग्न रहने से हम आध्यात्मिक वृद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
Commentary
Context
इस श्लोक का संदर्भ वन पर्व में है, जहाँ धर्म और आचार से संबंधित विचार साझा किए जा रहे हैं। यह श्लोक एक सामाजिक और धार्मिक उत्तरदायित्व का प्रतिनिधित्व करता है।
Meaning
कर्म और तप का संयोजन दिव्य beings और ऋषियों की कृपा प्राप्त करने का साधन है। यह हमें अपने कर्तव्यों का पालन करने की प्रेरणा देता है।
Application
यह श्लोक हमें याद दिलाता है कि हमारी की गई सही कर्म हमें उच्च आध्यात्मिकता की ओर ले जाते हैं। हमें अपने कार्यों में ईमानदारी रखनी चाहिए।
