Mahabharata Vana Parva – तां सुमध्यां पृथुश्रॊणीं परतिमां काञ्चनीम इव
Shloka (श्लोक)
तां सुमध्यां पृथुश्रॊणीं परतिमां काञ्चनीम इव
पराप्तेयं देवकन्येति दृष्ट्वा संमेनिरे जनाः
⚡ Quick Meaning
लोगों ने उस सुंदर कन्या जिनका नाम देवकन्या था, की अद्भुत छवि को देखकर उनकी प्रशंसा की।
Translations
English Translation
Upon seeing that beautiful maiden with a finely proportioned body, akin to a golden statue, the people were struck with awe and recognized her as a divine being, embodying grace and purity.
हिंदी अनुवाद
उस सुंदर कन्या को, जिसका शारीरिक रूप सुनहरे रूप से परिमित था, देखकर लोग स्तंभित हुए और उसे एक दिव्य स्वरूप मान लिया, जो grace और शुद्धता का प्रतीक थी।
Commentary
Context
यह श्लोक सावित्री की सुंदरता और मासूमियत का वर्णन करता है, जिसे लोग उसके दिव्य रूप के लिए प्रशंसा करते हैं।
Meaning
यह श्लोक दिखाता है कि सुंदरता और दिव्यता का एक विशेष स्थान होता है, जो लोगों को आकर्षित करता है।
Application
सावित्री की पहचान से हमें यह सिखने को मिलता है कि बाहरी सुंदरता और आंतरिक गुणों का सम्मिलित रूप कितना महत्वपूर्ण होता है।
