Mahabharata Udyoga Parva – कृतम इत्य एव दैत्येन्द्रम उवाच स च वै दविजः

Shloka (श्लोक)
कृतम इत्य एव दैत्येन्द्रम उवाच स च वै दविजः
परह्रादस तव अब्रवीत परीतॊ गृह्यतां वर इत्य उत
⚡ Quick Meaning
परह्राद ने दैत्यराज को बताया कि वह बहुत प्रसन्न है और वर मांगने के लिए आया है।
Translations
English Translation
Prahlada speaks to the demon king, expressing his contentment and readiness to ask for a boon. He wishes for the blessings that he finds beneficial. This interaction sets the stage for significant exchanges surrounding blessings and their implications.
हिंदी अनुवाद
परह्राद ने दैत्यराज से कहा कि वह प्रसन्न है और वर मांगने आया है। वह ऐसा वर चाहता है जो उसके लिए लाभकारी हो। यह वार्तालाप वरदान और उनके महत्व के आसपास महत्वपूर्ण आदान-प्रदान की दिशा में बढ़ता है।
Commentary
Context
यह श्लोक शांति पर्व का है, जहां भगवान विष्णु के भक्ति में स्थिर परह्राद वर मांगने के लिए आए हैं।
Meaning
यह श्लोक भक्ति और वरदान की प्रक्रिया में धर्म और भक्ति के महत्व को दर्शाता है।
Application
इससे यह सीख मिलती है कि सच्ची भक्ति से प्राप्त वरदान जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकते हैं।
