Mahabharata Udyoga Parva – यदि राजन परसन्नस तवं मम चेच्छसि चेद धितम

Shloka (श्लोक)
यदि राजन परसन्नस तवं मम चेच्छसि चेद धितम
भवतः शीलम इच्छामि पराप्तुम एष वरॊ मम
⚡ Quick Meaning
परह्राद ने दैत्यराज को अत्यंत प्रसन्नता से कहा कि वह उसके गुणों के अनुसार वर मांगना चाहता है।
Translations
English Translation
Pleased by the favor of the king, Prahlada expresses his desire to receive a boon that reflects the noble qualities of the king. The request highlights the importance of virtues and the expectation of a boon aligned with one’s character.
हिंदी अनुवाद
राजा की प्रसन्नता से प्रभावित होकर, परह्राद ने कहा कि वह राजा के गुणों के अनुरूप वर मांगना चाहता है। यह अनुरोध गुणों की महत्वता और वर की उम्मीद को दर्शाता है।
Commentary
Context
यह श्लोक भी शांति पर्व का एक भाग है, जहाँ परह्राद अपनी भक्ति से राजा को प्रसन्न कर रहा है।
Meaning
यह श्लोक व्यक्ति के गुणों और उसके अनुरूप वर पाने की आवश्यकता को दर्शाता है।
Application
यह दिखाता है कि व्यक्ति को अपनी इच्छाओं को अपनी अच्छाईयों के साथ पेश करना चाहिए।
